भागवत कथा का महात्म्य सुनना आवश्यक : आचार्य श्याम बिहारी चतुर्वेदी
भरौली में भागवत कथा

सलेमपुर। नगर के वार्ड नंबर-1 स्थित भरौली युगल सरकार मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन वृंदावन धाम से पधारे आचार्य श्याम बिहारी चतुर्वेदी ने भागवत कथा के महात्म्य का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा को समझने के लिए सबसे पहले उसके महात्म्य का श्रवण करना आवश्यक है। महात्म्य की चर्चा के बिना भागवत कथा का वास्तविक भाव समझना कठिन है।
कथा के दौरान आचार्य ने बताया कि भक्ति के दो पुत्र ज्ञान और वैराग्य कलियुग के प्रभाव से असमय वृद्ध हो गए थे। नारद जी के प्रयास से हरिद्वार स्थित आनंद घाट पर सनकादि कुमारों के मुखारविंद से उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। कथा के प्रभाव से ज्ञान और वैराग्य को वृद्धावस्था से मुक्ति मिली और उनमें पुनः चेतना का संचार हुआ। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि श्रीमद्भागवत कथा के प्रारंभ में उसके महात्म्य का श्रवण विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से कथा का श्रवण किया। इस अवसर पर समाजसेवी संजय श्रीवास्तव, धनंजय बरनवाल, सुनील बरनवाल, कथा के यजमान हीरालाल गुप्ता व उनकी पत्नी आशा गुप्ता, अखिलेश पांडेय, राकेश श्रीवास्तव, सूरज चौरसिया, गुड़िया तिवारी, बृजेश मद्धेशिया सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।




