अखिलेश जी! तीन महीने में आप की पार्टी ने इस मुद्दे पर कितनी बार संघर्ष किया?
लार बाई पास के लिए फिर संघर्ष का एलान

एन डी देहाती /स्वाभिमान जागरण
देवरिया। प्रतिपक्ष का काम है सत्ता को कठघड़े में खड़ा करना। जनहित के मुद्दों पर सरकार से सवाल कर उसे घेरना। जनता की दुशवारियों के लिए लड़ना। अपने संघर्ष की ताकत के बदौलत एक माहौल खड़ा करना, जिससे आम जनता को लगे कि गूंगी बहरी सरकार को जगाने के लिए कोई तो है। धरातल पर ऐसा कुछ दिख नहीं रहा। मीडिया के साथियों ने दर्जनों बार इस सड़क के मुद्दे पर सरकार व प्रशासन से सवाल किए लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला।
उदाहरण के तौर पर हम लार बाई पास सड़क का जिक्र करना चाहते हैं। मई माह में यह सड़क खोद कर छोड़ दी गयी। बरसात के दिनों में आवागमन बंद हो गया। आम जनता परेशान थी। जन प्रतिनिधि लोगों को यह सासत दिखाई नहीं दे रही थी। जन प्रतिनिधि लोगों लिखने का आशय यह है जिस क्षेत्र में यह सड़क है वहाँ विधायक भाजपा के और सांसद समाजवादी पार्टी के हैं।
लार कस्बे के एक हिंदूवादी नेता अरुण कुमार सिंह गुड्डू ने साहस दिखाया और अपने ही सरकार में लोकनिर्माण विभाग के खिलाफ न सिर्फ मुखर हुए बल्कि चार घंटे कीचड़ में लेटकर धरना दिये। लोकनिर्माण विभाग की नींद टूटी। तुरंत काम शुरू हुआ। मामले की गूंज पूरे देश में गूंजी। पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी इस मामले को संज्ञान तो लिया लेकिन सड़क के लिए किए जा रहे संघर्ष को कीचड़ नर्तन बताया था। अखिलेश जी ने इन शब्दों के जरिये भाजपा पर कड़ा तंज तो कसा लेकिन उसके बाद जब निर्माण काम फिर रुक गया तो न तो उन्होंने या उनके सांसद ने या उनके किसी कार्यकर्ता ने इस सड़क के लिए संघर्ष नहीं किया।

अखिलेश जी! 22 सितंबर वाली अपनी x की कमेंट पढ़ लीजियेगा। आप ने संघर्षशील समाजसेवी अरुण कुमार सिंह की तश्वीर भी लगाया था और जोरदार लिखा भी था, लेकिन तीन महीने से निर्माण काम बंद होने के बाद न आपने कुछ लिखा और न आपकी पार्टी के लोगों ने कोई लड़ाई लड़ी। फिर वही संघर्षशील समाजसेवी अरुण कुमार सिंह गुड्डू जनहित के लिए इस सड़क के लिए संघर्ष का एलान कर दिये हैं।
अरुण कुमार सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उक्त वीडियो में वे देवरिया की जिलाधिकारी व लोकनिर्माण विभाग पर कितने हमलावर हैं, आप सभी देखिये…



