पुरानी जनगणना पर नए आरक्षण चक्र के आधार पर होगा पंचायत चुनाव

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स्वाभिमान जागरण
लखनऊ। अबकी बार तीसरी दफा पुराने जनगणना के आधार पर ही आरक्षण का चक्र घूमेगा। वर्ष 2011 की पुरानी जनगणना को ही मुख्य आधार मानकर आरक्षण लागू किया जाएगा। ऐसे में तमाम पंचायतों में उन वर्गों के लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिल सकता है जहां पर उनकी जनसंख्या काफी कम है। पंचायतों में त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू होने के साथ ही आरक्षण व्यवस्था भी लागू की गयी थी। इसके तहत पंचायतों के सभी पदों ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत प्रमुख, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष व जिला पंचायत सदस्य में सभी वर्गों को आरक्षण दिया जाता रहा है। इसमें पिछड़ी जाति को 27 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 21 प्रतिशत व अनुसूचित जनजाति को दो प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। इसके साथ ही सभी वर्गों में आरक्षित पदों में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया जाता है। पंचायतों में आरक्षण की यह व्यवस्था 1995 से लागू हुई है जो वर्ष 1991 की जनगणना के आधार पर लागू की गयी थी। 1991 की जनगणना पर ही वर्ष 2000 के पंचायत चुनाव का आरक्षण लागू किया गया। इसके बाद वर्ष 2001 की जनगणना पर वर्ष 2005 व 2010 के पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू किया गया, फिर वर्ष 2011 की जनगणना पर 2015 व 2021 के पंचायत चुनाव कराये गये। अब स्थिति ऐसी उत्पन्न हो गयी है कि वर्ष 2021 में केन्द्र सरकार से जनगणना ही नहीं करायी है। यदि 2021 में जनगणना करायी जाती तो वर्ष 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव में इसके आधार पर आरक्षण लागू किया जाता लेकिन जनगणना न होने के कारण अब 2026 के पंचायत चुनाव में भी वर्ष 2011 की जनगणना पर ही आरक्षण लागू करना पड़ेगा।
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