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राजस्थान होगा खेलों में अग्रणी, मिशन ओलंपिक के लिए 100 करोड़ का बजट

जयपुर। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि राज्य सरकार खेलों के विकास पर गंभीरता से ध्यान दे रही है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को निखारा जा रहा है, और मिशन ओलंपिक के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिससे प्रदेश में खेलों को गति मिलेगी।

वासुदेव देवनानी ने अजमेर जिले के सेंट्रल अकादमी स्कूल में 68वीं राज्य स्तरीय राइफल शूटिंग प्रतियोगिता के समापन समारोह में भाग लिया। उन्होंने कहा कि राइफल का उपयोग 15वीं शताब्दी से लेकर आज तक विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया गया है, चाहे वह सैनिक उद्देश्यों के लिए हो या मनोरंजन के लिए। भारत में राइफल का उपयोग ब्रिटिश काल के दौरान सैनिक बटालियन में शुरू हुआ, और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से यह भारतीय सेना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रही है।

उन्होंने बताया कि राजस्थान का शूटिंग में ऐतिहासिक महत्व है। राजा-महाराजाओं के समय में हथियारों की उपलब्धता के कारण राजस्थान में शूटिंग की परंपरा रही है। बीकानेर के पूर्व शासक करणी सिंह ने 1960 से 1980 तक ओलंपिक में हिस्सा लिया। उनके प्रयास और समर्पण को सम्मानित करते हुए दिल्ली की सबसे बड़ी शूटिंग रेंज का नाम उनके नाम पर रखा गया। इसके बाद राज्यवर्धन राठौर ने 2004 में ओलंपिक पदक जीतकर राजस्थान के युवाओं में शूटिंग के प्रति आकर्षण को पुनर्जीवित किया।

देवनानी ने कहा कि वर्तमान में राजस्थान में 50 से अधिक शूटिंग रेंज हैं, और अपूर्वी चंदेला और अवनी लेखरा जैसी महिलाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान और भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने इन खिलाड़ियों को प्रेरणा स्रोत बताया और कहा कि इनसे प्रेरणा लेकर युवाओं को आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने खेलों के अनुशासन, सम्मान, नेतृत्व, टीमवर्क और प्रतिकूल परिस्थितियों पर काबू पाने की क्षमता को भी रेखांकित किया। अंडर-17 और अंडर-19 राजस्थान स्टेट राइफल शूटिंग चैंपियनशिप जैसे आयोजन विद्यालय स्तर पर खेलों के प्रति आकर्षण पैदा करते हैं, जो व्यक्ति के बहुमुखी विकास का साधन बनते हैं। अंत में, उन्होंने खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया।

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