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खतौनी के लिए तहसील का चक्कर लगाते किसान ने तोड़ दिया दम

देवरिया जिले के भाटपार रानी तहसील का मामला

 

खतौनी के चक्कर में किसान कचहरी में खून फेंककर मर गया

पांडे एन डी देहाती /स्वाभिमान जागरण
देवरिया। सब कुछ ऑन लाइन हुआ। कचहरी का काम अभी झंझावातों के जाल से जकड़ा ही है। इस भीषण ठंड में खतौनी के लिए कचहरी का चक्कर लगाते लगाते एक किसान मुंह से खून फेंककर मर जाता है, यह सिस्टम का ही दोष है। यदि किसान का काम नीयत समय पर हो गया होता तो उसकी जान नहीं जाती।
आज दोपहर गुरुवार को जनपद के भाटपार रानी तहसील में यह दृश्य जिसने भी देखा सभी ने तहसीलों की व्यवस्था को कोसा। देवरिया जिले के खामपार थाना क्षेत्र के नन्दपुर कुकुर घाटी के रहने वाले रामऔतार कुशवाहा (65) अपने बेटे पप्पू कुशवाहा के साथ खतौनी निकालने के लिए आज दोपहर तहसील आए। तहसील की ऊपरी मंजिल पर जाने के लिए सीढ़ी चढ़ते समय वे मुंह से खून फेंक कर लुढ़क गए। तहसील में हड़कंप मच गया। शोर सुनकर एसडीएम रत्नेश कुमार तिवारी दौड़े आए। अपनी गाड़ी से अस्पताल पहुंचाए, लेकिन प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ इमाम हुसैन ने कहा कि इनकी तो मौत हो चुकी है। डाक्टर ने हार्ट अटैक की आशंका जताई । प्रशासन की सूचना पर थानाध्यक्ष भाटपाररानी नंदा प्रसाद पुलिस बल के साथ पहुंचे। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। मृत किसान रामऔतार कुशवाहा के बेटे पप्पू के अनुसार खतौनी के लिए उसके पिता कई दिनों से तहसील का चक्कर लगा रहे है। उन्होंने बताया कि उनका जमीन विवाद भी चल रहा है। एक मामलें में डिक्री हुई है, आर्डर सरकारी अभिलेख में नहीं चढ़ रहा है। कई दिनों से हमलोग तहसील का चक्कर लगा रहे हैं।

किसान की मृत्यु के बाद कल से राजनीति भी होगी। नेताजी लोग नंदपुर जायेंगे। अपनी संवेदना जताएंगे। कुछ मदद देंगे। कुछ आश्वासन देंगे। सवाल एक राम औतार जी का नहीं है। यह सवाल इस सिस्टम का है जिसमें एक ही मामले के लिए किसान थाना दिवस, संपूर्ण समाधान दिवस , कोर्ट कचहरी दौड़ते दौड़ते मर जाता है लेकिन उसके जीवित रहते उसका नाम सरकारी अभिलेखों में नहीं चढ़ता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

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