चौथे दिन सम्राट अशोक के धम्म संदेशों पर हुआ विचार–मंथन।
बृजमनगंज क्षेत्र के फुलमनहा में बौद्ध धम्म जागरण।

स्वाभिमान जागरण संवाददाता बृजमनगंज महाराजगंज।
बृजमनगंज क्षेत्र के ग्रामसभा फुलमनहां स्थित अंबेडकर पार्क में आयोजित पांच दिवसीय बौद्ध धम्म जागरण के चौथे दिन सम्राट अशोक के जीवन, उनके धम्म परिवर्तन तथा बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में दिए गए योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने धम्म प्रवचनों को गंभीरता से सुना।
प्रवचनकर्ता आर. एल. बौद्ध ने बताया कि कलिंग युद्ध की भयावह विभीषिका से व्यथित होकर सम्राट अशोक ने हिंसा का मार्ग त्याग दिया और भगवान बुद्ध के करुणा, अहिंसा एवं मैत्री के सिद्धांतों को आत्मसात किया। बौद्ध धर्म स्वीकार करने के पश्चात सम्राट अशोक ने न केवल स्वयं धम्म का पालन किया, बल्कि उसके प्रचार-प्रसार हेतु अपने पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा को विदेश भेजा। उन्होंने विशेष रूप से श्रीलंका जाकर बौद्ध धर्म का प्रचार किया, जिससे वहां धम्म की सुदृढ़ नींव पड़ी।
आर. एल. बौद्ध ने यह भी बताया कि सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में धम्म स्तंभों एवं शिलालेखों के माध्यम से जनकल्याण, सामाजिक समरसता, न्याय और नैतिकता का संदेश जन-जन तक पहुँचाया। उनके धम्म संदेश आज भी मानवता को सही मार्ग दिखाने का कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन समाज सेविका डॉ. सावित्री भारती ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर रविन्द्र यादव, बबलू चौरसिया, डॉ. महेन्द्र भारती, जितेन्द्र कुमार, डॉ. विशाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं क्षेत्रीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।



