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जमसड़ा का यज्ञ : संकल्प पूरा करके करें सनातन की जयकार

कई कार्यक्रमों को लेकर संशय बरकरार, नहीं बोल रहे जिम्मेदार

स्वाभिमान जागरण देवरिया 

श्री रूद्रचंडी महायज्ञ व सामूहिक विवाह का आयोजन

25 मार्च से 19 अप्रैल तक विभिन्न कार्यक्रमों की भव्य रूप रेखा


अनिरुधाचार्य, गौरांग गौरी व देवकीनंदन ठाकुर के कार्यक्रम का प्रचार

 

भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी के कार्यक्रम का भी हुआ प्रचार

16 अप्रैल के सामूहिक विवाह को जोर शोर से प्रचार प्रसार

यज्ञ शुरू, रासलीला भी प्रारम्भ लेकिन शेष कार्यक्रम को लेकर संशय

परिसर में देवी देवताओं की अधूरी प्रतिमाओं को नहीं मिला परिधान 

देवरिया जिले के लार क्षेत्र स्थित जमसड़ा गाँव में पिंडी से भागलपुर जाने वाली सड़क के दक्षिण तरफ एक बड़े भूभाग में श्री रूद्र महायज्ञ तो किसी प्रकार शुरू हो गया, लेकिन कई कार्यक्रमों को लेकर अब भी संसय बरकरार है।
यज्ञ के लिए भूमि पूजन व ध्वज स्थापना का कार्यक्रम बड़े ही धूमधाम से हुआ था। जमसडा ही नहीं आसपास के गाँवों और लार क्षेत्र में इस यज्ञ को लेकर बड़ी चर्चा थी। वास्तव में यज्ञ की जो रूप रेखा बनाई गयी थी उसका स्तर बहुत ऊँचा था। दावा किया गया कि यहां देश के प्रसिद्ध कथाव्यास अनिरुद्धाचार्य, देवकी नंदन ठाकुर व गौरांग गौरी की कथाएं होगी। इतने महंगे कथावाचकों का ग्रामीण अंचल की इस धरती पर आयोजन कम महत्वपूर्ण नहीं है। एक बड़े परिक्षेत्र में विभिन्न देवी देवताओं, महापुरुषों की मिट्टी की बड़ी बड़ी प्रतिमाएँ बननी शुरू हुई। बीच में मूर्तिकलाकार आधा अधूरा कार्य छोड़कर चले गए, इससे संशय को बल मिला। यज्ञ के परिक्षेत्र में 108 शिवलिंग भी जो मिट्टी को रंग कर बनाये गए थे वह भी स्थापित हो गए। मेला प्रदर्शनी सब लग गया। लेकिन सब कुछ उदास उदास लग रहा। अर्द्ध निर्मित देवी देवताओं की प्रतिमाएँ अपने रंग रोगन व सजावट पूर्ण होने की आस में अब भी उदास हैं। जो लोग बड़े बड़े दावे कर रहे उनके संकल्प अधूरे दिखने लगे हैं।
गाँव के लोग प्रतिष्ठा खराब न हो इसके लिए किसी प्रकार यज्ञ तो शुरू करा दिए। एक दिन बाद से रासलीला भी शुरू हो गयी। सबसे बड़ा संकट सामूहिक विवाह के कार्यक्रम को लेकर है। इस बारे में हर कोई अभिभावक जिन्हें अपने बेटे -बेटियों का विवाह कराना था वे एक दूसरे से पूछ रहे कि क्या होगा? कैसे होगा? लेकिन कोई जिम्मेदार कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। तीनों बड़े कथावाचक आएंगे या नहीं? इस प्रश्न का भी कोई जवाब देने वाला नहीं है। कुल मिलाकर यह देखना होगा कि जिस भव्य रुपरेखा और उत्साह के साथ यज्ञ का प्रचार प्रसार किया गया उस कसौटी में आयोजक कितना खरा उतरते हैं। हर सनातनधर्मी को चाहिए कि यदि कहीं कोई अवरोध हो तो उसे सामूहिक रूप से लगकर यज्ञ पूरा कराएँ।

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