देवरिया एसपी संकल्प शर्मा लखनऊ के डीसीपी बने, जिले की कमान अब विक्रांत वीर के हाथ
देवरिया में 78 वें कप्तान के रूप में आए "वीर"


पांडे एन डी देहाती/स्वाभिमान जागरण
देवरिया। देवभूमि देवरिया के पुलिस कप्तान संकल्प शर्मा को यूपी की राजधानी लखनऊ का डीसीपी बनाया गया है। संकल्प शर्मा की जगह बलिया के एसपी विक्रांत वीर की तैनाती देवरिया में 78वें पुलिस अधीक्षक के रूप में हुई है। आईपीएस विक्रांत वीर साल 2014 बैच के अफसर हैं।वह मूल रूप से बिहार में नालंदा के रहने वाले हैं। आईपीएस बनने से पहले वह मर्चेंट नेवी में थे। 1997 में झारखंड के पलामू से 12वीं की पढ़ाई करने के बाद वह मुंबई पहुंच गए। जहां मरीन इंजीनियरिंग कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की। इसके बाद नेवी में नौकरी लग गई।नौकरी के साथ विक्रांत वीर ने यूपीएससी की भी तैयारी शुरू कर दी। 2014 में विक्रांत वीर का यूपीएससी में चयन हो गया. उनकी पहली तैनाती कानपुर में बतौर एएसपी हुई। इसके बाद वह फैजाबाद और बलिया के एसएसपी भी रहे। उसके बाद वह लखनऊ ग्रामीण के एसपी बने। उसके बाद उन्हें हाथरस का एसपी बनाया गया। प्रदेश के बहुचर्चित हाथरस कांड के बाद विक्रांत वीर को सस्पेंड कर दिया गया था। यूपी के इतिहास का यह पहल कांड था जिसमें आरोपी, पीड़ित और पुलिस तीनों की बात पर भरोसा नहीं होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने तीनों पक्षों का नार्को टेस्ट कराने के निर्देश दिए थे।
आईपीएस विक्रांत वीर एसपी उन्नाव के पद पर भी काम कर चुके हैं। वाराणसी में पुलिस उपायुक्त, वरुणा जोन का पद सम्भाल चुके है। 32वीं वाहिनी पीएसी में सेनानायक के पद पर भी रहे हैं।
ढाई साल देवरिया के पुलिस प्रमुख रहे संकल्प शर्मा
आईपीएस संकल्प शर्मा ने 1 जून 2022 को देवरिया के 77वें एसपी के रूप में कार्यभार संभाला था। जनता के साथ संवाद में सहज संकल्प शर्मा के राज में देवरिया में कई हत्याएं हुई। कई पुलिस मुठभेड़ भी हुई, जिसमें अपराधियों के पैर में गोली मारकर उन्हें गिरफ्तार किया गया। कुछ हत्याओं के राज अपने कार्यकाल में संकल्प शर्मा नहीं खुलवा सके। लार में रहमान (18वर्ष) हत्याकांड, भुडसरी गांव के राहुल ( 26 वर्ष) हत्याकांड,चंद्रावती देवी हत्याकांड का राजफाश कराने में संकल्प शर्मा असफल साबित हुए। यह तीनों ब्लाइंड मर्डर संकल्प शर्मा के ही कार्यकाल में हुए। जिले में बहुचर्चित फतेहपुर कांड के दौरान संकल्प शर्मा ने जिले को जातीय और राजनीतिक हिंसा में जलने से बचा लिया था। अपने कार्यकाल में संकल्प शर्मा ने जनता और जनप्रतिनिधियों सबकी सुना, लेकिन जो सही था उसी पर कार्रवाई हुई। ढाई वर्ष का देवरिया का इनका कार्यकाल सामान्य रहा।



