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उत्तरा के गर्भ से भगवान ने परीक्षित के रूप में लिया जन्म: पंडित अरविंद कृष्ण

बलुआ गौरी में श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ

उत्तरा के गर्भ से भगवान ने परीक्षित के रूप में लिया जन्म: पंडित अरविंद कृष्ण

स्वाभिमान जागरण संवाददाता
देवरिया। जिले के लार विकास खंड के बलुआ गौरी में श्रीमद भगवद कथा के दूसरे दिन मुख्य यजमान गिरिजेश सिंह और रीना देवी को कथा सुनाते हुए कथा व्यास पंडित अरविंद कृष्ण ने महाभारत युद्ध के बाद द्रोपदी के पांचों पुत्रों की हत्या अश्वत्थामा द्वारा किए जाने के बाद भी गुरुपुत्र को दंड देने की जगह माफ कर देने की कथा सुनाई।
कथा के दौरान बुधवार की रात आचार्य अरविंद कृष्ण ने कहा कि महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। पांडव पक्ष के लोग विजय की खुशी में सुख की निद्रा में लीन थे। उनकी ऐसी धारणा थी कि कौरव पक्ष का एक भी व्यक्ति शेष न रहने के कारण युद्ध समाप्त हो चुका है, किंतु यह उनकी भूल थी। कौरव पक्ष का एक व्यक्ति जीवित था, जिसके हृदय में बदला लेने की भावना रह-रहकर धधक रही थी। वह था गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र अश्वत्थामा। उसने युद्ध के नियम ताक पर रख दिए और हाथ में तलवार लिए पांडवों के शिविर में प्रवेश किया। उसने द्रौपदी के पांच पुत्रों का वध कर दिया। अश्वत्थामा का यह कुकृत्य जब दूसरे दिन द्रौपदी को पता चला तो वह पुत्रों के शोक में विह्वल हो गई। उसके हृदय में क्रोध की ज्वाला धधक उठी। उसकी हालत देख अर्जुन भी आक्रोशित हो गया। वह द्रौपदी से बोला, ‘पांचाली, शोक न करो। मैं उस नीच को अभी पकड़कर तुम्हारे सामने पेश करूंगा और इसका बदला लूंगा।’ भीम ने भी अर्जुन का साथ दिया और वे दोनों अश्वत्थामा को बांधकर द्रौपदी के पास ले आए। गुरुपुत्र को इस प्रकार से बंधा देख द्रौपदी का कोमल ममतामय हृदय पिघल गया। अर्जुन ने जैसे ही अश्वत्थामा का शीश काटने के लिए तलवार उठाई द्रौपदी ने उसका हाथ थाम लिया। वह बोली, ‘स्वामी, आप इसे पकड़ लाए, बस इतने से ही मैं संतुष्ट हूं। यह गुरुपुत्र है, इसे छोड़ दिया जाए क्योंकि इसकी माता कृपी अभी भी जीवित हैं और मैं नहीं चाहती कि वह भी इसके वियोग में शोक करें। पुत्र शोक का मुझे पूर्ण अनुभव है। मैं नहीं चाहती कि एक माता को शोक के सागर में डुबाया जाए। अश्वत्थामा ने इसके बाद नहीं माना उसने उत्तरा के गर्भ में पल रहे अभिमन्यु के शिशु की हत्या के उद्देश्य से ब्रह्मास्त्र से कोख में ही मारने का उपक्रम किया। उत्तरा,द्रोपदी, कुंती आदि के अनुनय विनय पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपने दूसरे रूप में उत्तरा के गर्भ में स्थापित होकर अपने चक्र सुदर्शन से अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र को निष्फल कर दिया। भगवान ने ही उत्तरा के गर्भ से परीक्षित के रूप में अवतरित हुए।
कथा के दौरान प्रमुख रूप से बृजेश दुबे, साहू ध्रुव कुमार गुप्ता, मनीष कुमार सिंह, चंद्र प्रकाश सिंह, अजीत कुमार सिंह, रणधीर सिंह, रणविजय सिंह, दिलीप मल्ल, उदय प्रताप सिंह, रजनीश पटेल, अश्वनी कुमार सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

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