मिश्रौलिया सिवान में सारस पक्षियों की बढ़ी चहल कदमी।
बारिश का मौसम आते ही बढ़ने लगती है जलीय पक्षियों की संख्या ।

स्वाभिमान जागरण संवाददाता, खोरिया बाजार, महराजगंज।
सोहगी बरवा वन्य जीव प्रभाग निचलौल वन क्षेत्र के मिश्रौलिया ताल में सारस पक्षियों की आवाजाही बढ़ गई है। दर्जनों की संख्या में सारस पक्षियों के झुंड दिखाई दे रहे हैं। वन
क्षेत्राधिकारी सुनील राव के अनुसार, सारस पक्षी जलीय और दलदली क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं। ये तालाब, झील, नदी और तराई वाले इलाकों में अधिक पाए जाते हैं। उत्तर प्रदेश का राज्य पक्षी सारस, उड़ने वाले पक्षियों में दुनिया का सबसे बड़ा पक्षी होता है। सारस की एक खास बात यह है कि ये हमेशा जोड़ों में रहते हैं। साथी के खो जाने पर दूसरा जोड़ा नहीं बनाते। जून में जोड़े बनाते हैं और जून के पहले सप्ताह से अगस्त तक अंडे देने का क्रम चलता है। एक वर्ष में एक या दो अंडे देते हैं। नर और मादा दोनों अंडों की देखभाल करते हैं। अगस्त-सितंबर में बच्चे निकलना शुरू कर देते हैं।वन विभाग सारस पक्षियों की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों को जागरूक किया जाता है और घोंसलों की निगरानी की जाती है। किसान उमाशंकर पाल, भानु प्रताप,दीपक, राहुल, छविलाल, शैलेश, महेंद्र,अशोक, पारस, तपेसर, नागेंद्र, कतवारू और शिवनाथ ने बताया कि मिश्रौलिया ताल में सारस पक्षियों की संख्या में वृद्धि हुई है। हल्की बारिश में ये पक्षी खेतों की तरफ आना शुरू कर देते हैं और मौसम के बदलाव के साथ यहां के वातावरण का आनंद लेते हैं।



