रतनपुर में भव्य हिंदू सम्मेलन आयोजित,।

स्वाभिमान जागरण संवाददाता आनन्दनगर महराजगंज।
शान्ति लॉन, रतनपुर में दिनांक 29 दिसम्बर 2025 को एक भव्य हिन्दू सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। सम्मेलन के मुख्य वक्ता जिला प्रचारक नागेंद्र जी रहे तथा अध्यक्षता कपिलदेव जी ने की। कार्यक्रम का शुभारम्भ भारत माता की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ किया गया।
अपने उद्बोधन में वक्ताओं ने कहा कि एकजुट होकर ही भारतीय संस्कृति की रक्षा संभव है। उन्होंने बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए समाज को सजग एवं जागरूक रहने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों एवं विद्वानों द्वारा संस्कृति की रक्षा हेतु किए गए कार्य अद्वितीय एवं अनुकरणीय हैं।
वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि राजनीति राष्ट्रहित में होनी चाहिए। हमारे संस्कार सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय हों, जिससे मिशनरी सभ्यता का प्रभाव हमारे बच्चों पर न पड़े। हमारे बच्चे भारतीय संस्कृति से युक्त हों तथा उनका जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पित हो।“यदि राष्ट्र और संस्कार जीवित हैं, तभी अखंड भारत सुरक्षित रहेगा।”
“तेरा वैभव अमर रहे, हम दिन चार रहें न रहें।”
वक्ताओं ने यह भी कहा कि संगठित होकर ही समाज में सदाचार को प्रेरित किया जा सकता है। प्रेम नारायण पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि “राष्ट्र प्रथम” हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक समय था जब लोगों को स्वयं को हिन्दू कहने में संकोच होता था, किंतु आज हिन्दू समाज में व्यापक जागरण आया है। इसके बावजूद हमें विरोधी शक्तियों से सतर्क रहने की आवश्यकता है।
उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज एवं राष्ट्र निर्माण के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है। जैसे भगवान श्रीराम ने वानर सेना के सहयोग से रावण का विनाश किया, वैसे ही समाज की एकता से राष्ट्र सशक्त बनता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपने धर्म से विचलित नहीं होना चाहिए तथा समाज में एकता बनाए रखनी चाहिए।
जिला प्रचारक जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि “मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है।”
उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने भारतीय संस्कृति का परचम पूरे विश्व में लहराया। साथ ही उन्होंने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में यह हिन्दू सम्मेलन विश्वभर में आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के पुत्रों—साहिबजादे जोरावर सिंह एवं फतेह सिंह के बलिदान का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने धर्म एवं संस्कृति की रक्षा के लिए हँसते-हँसते अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनके बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि “यदि हम एक हैं, तो विश्व की कोई शक्ति हमारे सामने टिक नहीं सकती।”
अध्यक्ष कपिलदेव जी ने कहा कि इस प्रकार के हिन्दू सम्मेलन विश्व कल्याण, सांस्कृतिक संरक्षण एवं समाज जागरण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।पूर्व प्राचार्य डा चंद्रशेखर मिश्र, अर्जुन प्रसाद मिश्र, राके मणि ने भी संबोधित किया। मंच संचालन रामसरन गुप्त ने किया।
कार्यक्रम में हिमांशु , सुनील पाण्डेय , प्रशांत मणि , नवीन सोनकर , शिवम् जायसवाल, कमल यादव , कृष्णा , शैलेश कुमार मिश्र, राजीव चौबे सहित समाज के सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



