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शराब भट्ठी के आस पास अवैध चखने की दुकानें कर रही बार का काम, अधिकारी मस्त, जनता त्रस्त।

मंदिर और विद्यालय से दूरी मात्र 50 मीटर ।

स्वाभिमान जागरण संवाददाता बृजमनगंज, महराजगंज।

 

घनी आबादी वाले बृजमनगंज कस्बे के बीच में संचालित हो रहीं शराब की दुकानों के बाहर जहां से मंदिर व विद्यालय पचास मीटर भी दूर नहीं है, वहीं आसपास नियमों को दरकिनार करते हुए ठेले आदि स्थानों पर खुलेआम लोग शराब पीते हैं। इस के साथ ही नशे में होने के बाद उनके द्वारा किए जाने वाले हुड़दंग से राहगीर ही नहीं आसपास रहने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मुख्य मार्गो पर स्थित शराब की दुकानों में शाम के बाद खासतौर से महिलाएं, युवतियों का निकलना मुश्किल हो जाता है। नशेड़ी लोगों की फब्तियां व छेड़छाड़ अक्सर होती रहती हैं। समय समय पर प्रकाशित होने वाली खबरों का भी जिम्मेदारों पर कोई असर नहीं पड़ता। खबरों के बावजूद आज तक स्थितियों में कोई खास बदलाव नही आया है। मुख्य मार्ग पर शराब की दुकान में, आसपास खड़े ठेले, लाई-चना आदि की दुकानों पर खुलेआम लोग शराब पीते नजर आते हैं। इसे लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है। सभी ने कहा कि खुले में शराब पीने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। आज भी लेदवा चौराहा, मामी चौराहा, लेहरा स्टेशन, बांग्ला चौराहा,के पर शराब दुकान होने के कारण दिन ढलने के बाद महिलाओं और युवतियों का गुजरना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि शराबियों के द्वारा की जाने वाली छींटाकशी और उनके जमघट लगने से तथा कई बार तो शराब दुकान के सामने ही या आसपास में जाम छलकाने से विवाद और असुरक्षा का भाव उत्पन्न हो जाता है। यही नही जिले में शराब की दुकानों के खुलने और बंद होने का समय निर्धारित है, लेकिन कही भी इन नियमों का पालन होता नही दिखाई दे रहा प्राप्त तस्वीरों में साफ़ देखा जा सकता है कि शराब दुकान के ठीक सामने या फिर कहे आस पास पर शराबियों का जमघट लगा हुआ है। नियमतः शराब दुकान से शराब खरीदकर उसे सार्वजनिक स्थान पर पीना अपराध है। लेकिन यहाँ नजारा कुछ और ही है जहां पूरी दुकान के आसपास का क्षेत्र ओपन बार में तब्दील कर दिया गया है। कई बार विवाद के बाद अधिकारी मौन हैं, दुकानदार और पीने वाले मस्त।

हैरानी की बात यह है कि शराब दुकान ठेकेदार केवल शराब ही नहीं, बल्कि उसके साथ पानी के बोतल, डिस्पोजल गिलास और अन्य सामग्री भी धड़ल्ले से बेच रहे हैं। यह सब कुछ इसलिए किया जा रहा है ताकि पियक्कड़ों को दुकान के बाहर ही पूरी सुविधा मिल सके। प्रशासन की यह कैसी मुस्तैदी है कि अधिकारी की आँखों के सामने ही चखना और डिस्पोजल की दुकानें सज रही हैं?

यदि बात किया जाए नियमों की तो आबकारी विभाग धज्जियां में पीछे नहीं रहता। जबकि आबकारी नियमों के अनुसार दुकान के बाहर भीड़ जमा होना और शराब पीना पूर्ण प्रतिबंधित है। वही अधिकारी की चुप्पी कि बात करे तो विभाग के ज़िम्मेदार अधिकारी के संज्ञान में यह सब है तो कार्रवाई न होना किसी सांठगांठ की ओर इशारा करता है।

शराबियों के खुलेआम तांडव और सड़क पर खड़े वाहनों के कारण राहगीरों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों का वहां से निकलना दूभर हो गया है। क्या आबकारी विभाग ने शराब माफियाओं और दुकान ठेकेदारों को खुली छूट दे रखी है? आँखों पर पट्टी बांधे बैठे अधिकारी शायद किसी बड़ी अप्रिय घटना का इंतज़ार कर रहे हैं। यदि समय रहते इन अवैध गतिविधियों पर लगाम नहीं कसी गई, तो यह खुला खेल शासन की छवि को और अधिक धूमिल करेगा। आबकारी अधिकारी दीपेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि मामला संज्ञान में नहीं है जबकि इस तरह की गतिविधियां खुलेआम हो रही हैं।

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