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देवाश्रम मठ लार की महान परम्परा- महा निर्वाणी अखाड़ा के चयन पर बनाया जाता महंत और महंत ही होता है शिक्षण संस्थाओं का प्रबंधक

मौजूदा समय में स्वामी में स्वामी अभयानन्द गिरी हैं महंत व प्रबंधक

एन डी देहाती / स्वाभिमान जागरण

देवरिया जिले के लार स्थित देवाश्रम मठ लार और उससे जुड़ी शिक्षण संस्थाओं का गौरवशाली व ऐतिहासिक महत्व रहा है। मौनी बाबा व नागा बाबा की इस तपोभूमि पर स्वामी देवानंद महराज ने शिक्षा की ज्योति जलाई। देवानंद जी महराज के उत्तराधिकारी स्वामी चंद्र शेखर गिरी जी महराज ने शिक्षा की इस ज्योति को शिखर तक पहुंचाया। चंद्रशेखर गिरी जी महराज के उत्तराधिकारी स्वामी भगवान गिरी और उनके बाद स्वामी भगवान गिरी के उत्तराधिकारी स्वामी अभयानन्द गिरी देवाश्रम की गद्दी पर महंत हैं।

देवाश्रम मठ लार के महंत व प्रबंधक के पद को लेकर संस्था के कुछ महत्वपूर्ण नियम हैं, उन नियमों के आधार पर ही यह संस्था संचालित होती है। इस संस्था का संचालन पंचायती महा निर्वाणी अखाड़ा के द्वारा किया जाता है। इस अखाड़े का साधु ही सबकी सहमति से महंत बनाया जाता है। महंत की गद्दी पर बैठाने के पूर्व, साधु का पट्टाभिषेक होता है जिसमें संस्था से जुड़े साधु -सन्यासी- महंत उपस्थित होते हैं और निर्वाणी नियमों का पालन करते हुए नए महंत का पट्टाभिषेक कर उन्हें गद्दी पर बैठाते हैं। लगभग दो वर्ष पूर्व निर्वाणी अखाड़ा ने देवाश्रम मठ लार के महंत के रूप में स्वामी अभयानन्द गिरी का पट्टाभिषेक कर उन्हें गद्दी सौंप दी। तबसे देवाश्रम मठ लार क महंत स्वामी अभयानन्द गिरी हैं। शिक्षण संस्थाओं के संचालन के लिए एक प्रबंधकीय समिति भी काम करती है जिसमें लगभग 35 सदस्य हैं। नियमों के अनुसार महंत ही प्रबंध समिति का अध्यक्ष होता है इस लिए वही प्रबंधक भी होता है।

इधर कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर तरह -तरह की बातें प्रसारित की जा रहीं हैं। सनातन धर्म के इस पवित्र पीठ पर पहले भी कुछ लोगों ने ऊँगली उठाईं लेकिन निर्वाणी अखाड़ा ने समय रहते सब सामान्य स्थिति में ला दिया था । आशा व विश्वास है कि पंचायती महा निर्वाणी अखाड़ा के पूजनीय साधु -सन्यासी मौजूदा समय की परिस्थिति को भी सम्हाल लेंगे व देवाश्रम मठ लार के गौरवशाली परम्परा को कायम रखकर सनातन धर्म को मजबूती प्रदान करेंगे।

 

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