यूपी में औसतन डेढ़ हजार ट्रांसफार्मर रोज दग रहे
गाँवों में लोग चंदा एकत्रित कर निजी लाईनमैनों की ले रहे मदद

स्वाभिमान जागरण देवरिया। बिजली वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है। बिजली के न रहने से केवल पंखा और बल्ब ही नहीं, मोबाईल चार्जिंग, पानी की टंकी, पीने का पानी, इलेक्ट्रोनिक वाहन की चार्जिंग और लोगों के घर इंडक्शन चूल्हे पर बनने वाली रोटी भी मुहाल हो जाती है। उत्तर प्रदेश में इस गर्मियों के मौसम में औसतन डेढ़ हजार ट्रांसफार्मर दग रहे हैं। हाल के वर्षों में बेहतर प्रबंधन के चलते अधिकतम चार दिन के भीतर बिजली बहाल हो जा रही है।
बिजली विभाग में सबसे बड़ी दिक्क़त नियमित कर्मचारियों की कमी है। निजी लाइन मैन हर काम के लिए पैसे पहले ले रहे तब कोई फ़ाल्ट ठीक हो रहा। बिजली विभाग जले ट्रांसफार्मर की जगह दूसरा ट्रांसफार्मर तो उपलब्ध करा दे रहा है लेकिन ले जाने, ले आने तथा ट्रांसफार्मर चढ़वाने के लिए उपभोक्ता आपस में चंदा लगा कर निजी लाइनमैनों को देकर तब बिजली बहाल करा रहे हैं।
बिजली विभाग के टोल फ्री नंबर 1912 पर शिकायत के बाद भी शीघ्र समाधान नहीं हो रहा है। हालात यह है कि एक-एक निजी लाईन मैन अपने सहयोग के लिए दो -दो लाइन मैन और रख लिए हैं। उपभोक्ता को यह बताकर कि हम तीन लोग आप का फ़ाल्ट ठीक किए हैं कम से कम 1500 दीजिये। ट्रांसफार्मर लाने वाला वाहन चालक बोलता है पांच सौ हमको दीजिये। ये सभी पहले एडवांस में नहीं मिलेंगे तो आप का काम अधर में लटका रहेगा। यह किसी एक क्षेत्र विशेष की बात नहीं समूचे सूबे की यही दशा है।



