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जनहित में डॉ बीवी सिंह का स्थानांतरण रोकने की उठी मांग

लार युवा मोर्चा ने जिलाधिकारी देवरिया से लगाई गुहार

स्वाभिमान जागरण देवरिया 

लार सीएचसी अधीक्षक के हुए तबादले को लेकर डीएम को भेजा गया पत्र

शनिवार को जारी आदेश के बाद तेज हुई प्रतिक्रिया, स्वास्थ्य सेवाओं पर असर की आशंका

लार। शनिवार को सीएचसी लार के अधीक्षक डॉ. बीवी सिंह के रुद्रपुर तबादले का आदेश जारी होते ही क्षेत्र में इस तबादले के विरोध के स्वर तेज हो गए।इसी क्रम में लार नगर की समाजसेवी संस्था लार युवा मोर्चा की ओर से जिलाधिकारी को पत्र भेजकर तबादला आदेश निरस्त करने की मांग की गई है। संस्था के अध्यक्ष साहू विशाल कुमार गुप्ता ने भेजे गये पत्र में कहा है कि डॉ. बीवी सिंह के कार्यकाल में सीएचसी लार की स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आम जनता को बेहतर इलाज एवं सुविधाएं मिल रही थीं, जिससे क्षेत्र के लोगों में संतोष का माहौल बना हुआ था। अधीक्षक के अचानक स्थानांतरण से स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे आमजन को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि उनके कार्यकाल में अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार हुआ, जिसमें प्रसूति भवन का निर्माण, जांच सुविधाओं का विस्तार, परिसर का सुंदरीकरण एवं साफ-सफाई जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। वर्तमान में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने का कार्य भी प्रगति पर बताया जा रहा है।संस्था ने अपने पत्र जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि जनहित एवं क्षेत्र की जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण आदेश पर पुनर्विचार कर उसे निरस्त किया जाए।


14 साल बेमिसाल

 

तबादला आदेश आने के कुछ मिनट पूर्व ही डॉ बीवी सिंह की पहल पर जिलाधिकारी के निर्देश पर  नगर पंचायत लार के ईओ अमित सिंह अस्पताल में भराव की समस्या दूर करने के लिए उनसे विचार विमर्श कर रहे थे। आक्सीजन प्लांट के आने के समय अस्पताल का गेट टूट गया था उस जगह भी भव्य गेट बनाने के लिए विचार विमर्श हो रहा था। कहने का आशय यह है कि डॉ बीवी सिंह लार अस्पताल के विकास के लिए निरंतर लगे रहते थे।

डॉ बीवी सिंह लगभग 14 साल पूर्व तब सीएचसी के अधीक्षक के रूप में आये जब यह अस्पताल खस्ताहाल था। मरीजों को अस्पताल से दवा नहीं मिलती थी। कोई डॉक्टर समय से नहीं बैठता था। डॉ बीवी सिंह ने बहुत सुधार किया, या यूँ कहें कि अस्पताल का कायाकल्प ही कर दिया। अधीक्षक की कुरसी पर बैठकर न सिर्फ बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था दुरुस्त की बल्कि प्रतिदिन लगभग सौ मरीज स्वयं देखते थे। डॉ बीवी सिँह का प्रयास रहता था कि मरीजों को बाहर की दवा न खरीदना पड़े। अस्पताल से दी जाने वाली मुफ्त दवा से ही मरीज स्वस्थ हो रहे थे। अस्पताल से बाहर अनावश्यक जांच पर डॉ बीवी सिंह के कार्यकाल में रोक लगी। करोनाकाल में तो डॉ बीवी सिंह बहुत से मरीजों के लिए भगवान बन गए। शनिवार को जब डॉ बीवी सिंह के ट्रांसफर का आदेश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो लोग तरह तरह के कमेंट भी करने लगे। ज्यादातर लोग उन्हें लार में रोके जाने का अनुरोध शासन प्रशासन से किए। यह सब कुछ उनकी लोकप्रियता का ही नतीजा रहा।

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