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मिशन शक्ति केंद्र अभियान को और सक्रिय बनाने की मुहिम

रविशंकर तिवारी/स्वाभिमान जागरण की विशेष रिपोर्ट 

देवरिया। 30 जून 2026 को देवरिया पुलिस लाइन प्रेक्षागृह, यूनिसेफ एवं पुलिस सहयोग से महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा को संस्थागत मजबूती देने की दिशा में “बहू–बेटी सम्मेलन” पर एकदिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन का आयोजन किया गया। देवरिया में मिशन शक्ति तो पहले से ही क्रियाशील है लेकिन एसपी अभिजीत आर. शंकर इसे और ज्यादा प्रभावशाली बनाने की मुहिम शुरू किए हैँ। महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध एवं लिंग आधारित हिंसा की रोकथाम के उद्देश्य से गोरखपुर जोन में संचालित “बहू–बेटी सम्मेलन” पहल के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आज देवरिया में एक एकदिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई । कार्यशाला 12 बजे शुरू हुई और साढ़े चार बजे सम्पन्न हुई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अभिजीत आर. शंकर, पुलिस अधीक्षक, देवरिया रहे, जबकि राजेश कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी, देवरिया विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे । इसके अतिरिक्त देवरिया से के समस्त सर्किलों से पुलिस उपाधीक्षक, समस्त पुलिस थानों से मिशन शक्ति केंद्र प्रभारी एवं मिशन शक्ति केंद्र से दो-दो महिला पुलिस कार्मिक, विभिन्न विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी, यूनिसेफ से श्री शैलेश प्रताप सिंह एवं सुश्री पल्लवी राय ने प्रतिभाग किया । कार्यशाला की शुरुआत अतिथियों को लाइव प्लांट देने से किया गया गया, उसके पश्चात् श्री आनंद कुमार पाण्डेय, अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) ने स्वागत सम्बोधन किया उसके बाद यूनिसेफ के मण्डलीय बाल संरक्षण सलाहकार शैलेश प्रताप सिंह ने कार्यशाला के उद्देश्य एवं परिचय के विषय में बताया ।

पुलिस अधीक्षक, देवरिया अभिजीत आर. शंकर ने अपने संबोधन में कहा कि बहू-बेटी सम्मेलन महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि जनपद में विभिन्न विभाग अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पृथक रूप से करते हैं, जबकि अधिकांश विभागों के कार्यों में परस्पर समानता है तथा उनका लक्षित समूह भी एक ही है, जिसमें महिलाओं की प्रमुख भूमिका है। यदि सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करें, तो बहू-बेटी सम्मेलन के उद्देश्यों की प्रभावी प्राप्ति सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित अपराधों की रोकथाम, संरक्षण तथा सहायता प्रदान करने के लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय एवं अभिसरण के माध्यम से कार्य करना चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि मजिस्ट्रियल शक्तियों तथा महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित संरक्षण गृहों का संचालन जिला प्रशासन के अधीन होता है, इसलिए पुलिस एवं जिला प्रशासन सहित सभी संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी लैंगिक पूर्वाग्रह तथा पारंपरिक लैंगिक भूमिकाएँ विद्यमान हैं, जिनके अनुसार पुरुषों को आजीविका अर्जित करने तथा महिलाओं को परिवार एवं बच्चों की देखभाल तक सीमित माना जाता है। यद्यपि इस सोच में परिवर्तन प्रारंभ हो चुका है, तथापि इसमें और अधिक सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशिक्षण में उपस्थित सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे यहाँ प्राप्त ज्ञान एवं अनुभवों को केवल अपने कार्यक्षेत्र तक सीमित न रखें, बल्कि अपने व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में भी व्यवहारिक रूप से अपनाएँ। अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पुलिस महानिदेशक, गोरखपुर जोन द्वारा प्रारंभ की गई इस अभिनव पहल को सभी विभागों के सहयोग से निर्धारित लक्ष्यों तक सफलतापूर्वक पहुँचाया जाएगा।मुख्य विकास अधिकारी, श्री राजेश कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि जब भी ग्राम पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ, तब समुदाय को यह अवश्य बताया जाए कि वे अपने बच्चों पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध होने वाले अनेक अपराधों में आरोपी प्रायः परिवार अथवा निकट परिचित व्यक्ति ही होते हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ मित्रवत एवं विश्वासपूर्ण संबंध स्थापित करने चाहिए, जिससे बच्चे अपनी समस्याओं एवं अनुभवों को खुलकर साझा कर सकें तथा उनका समय रहते उचित समाधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि अपराध अथवा अन्य सामाजिक संकेतकों से संबंधित आँकड़ों को देखकर घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उनका गहन विश्लेषण कर उनके मूल कारणों को समझने और उनके प्रभावी समाधान पर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आँकड़ों में वृद्धि केवल समस्या के बेहतर रिपोर्टिंग का संकेत भी हो सकती है; इसलिए आवश्यक है कि तथ्यों का समुचित विश्लेषण करते हुए प्रभावी हस्तक्षेपों के माध्यम से अपराधों में कमी लाई जाए। उन्होंने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष बल देते हुए कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सक्षम बनाना ही उनके वास्तविक सशक्तिकरण की आधारशिला है। उन्होंने सभी विभागों से अपील की कि वे समन्वित प्रयासों के माध्यम से महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक एवं अवसरपूर्ण वातावरण के निर्माण हेतु निरंतर कार्य करें।

 

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