ए देश के कर्णधारों ! सौ वर्ष की सेनानी प्रभावती ताई की भी सुधि ले लीजिये
सलेमपुर क्षेत्र के माधवापुर की महिला सेनानी प्रभावती पांडेय के दरवाज़े तक पक्की सड़क बनवा दीजिये

स्वाभिमान जागरण देवरिया। सलेमपुर क्षेत्र के मधवापुर गाँव के एक दम्पती गांधी के सत्याग्रह व सुभाष बाबू के आजाद हिन्द फ़ौज के लिए जीवन भर काम किये। पति -पत्नी दोनों अंग्रेजी हुकूमत में 24 माह जेल की यातना सहे। न टूटे, न झुके, न रुके। देश की आन के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिए। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्रीराम पांडेय तो गत वर्ष दुनिया छोड़ चले। अब उनकी पत्नी जो स्वयं भी सेनानी हैँ। जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैँ। कान से कम सुनाई देता है। बोलने में दिक्क़त है। बीमार रहती हैँ। सभी को पता है ज़ब इनका शरीर छूटेगा तो देश के रहनुमा और नौकरशाह अन्तेष्टि में पहुंचेगे। सम्मान के साथ अंतिम विदाई देंगे। बेहतर होगा आज जीवित स्थिति में भी उन्हें सम्मान दे दीजिये। उनकी आवश्यकताओं पर थोड़ा ध्यान दे दीजिये। आप की ख्याति बढ़ेगी। आप की लोकप्रियता बढ़ेगी और उन्हें थोड़ा सकून मिलेगा। 15 अगस्त की व्यस्तता में से कुछ पल एक जीवित महिला सेनानी के साथ गुजार लेंगे तो बहुत आशीर्वाद मिलेगा। ये देश की धरोहर हैँ। आज हैँ, पता न कितने दिनों की उनकी साँसे शेष हैँ. समय है, राष्ट्र के इस गौरव को याद कर लीजिये। सलेमपुर के मधवापुर गांव निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्रीराम पांडेय ने वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में महात्मा गांधी के आह्वान पर सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनका घर उस दौर में आंदोलनकारियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गया था। क्रांतिकारियों के घर में छिपे होने की सूचना किसी ने अंग्रेज अफसर लॉर्ड वेलेंक्टन को दे दी। इसके बाद पुलिस मधवापुर स्थित श्रीराम पांडेय के घर पहुंची। उनकी पत्नी प्रभावती पांडेय ने घर में किसी के नहीं होने की बात कही, लेकिन अंग्रेज अफसर ने जबरन घर में प्रवेश कर तलाशी ली। श्रीराम पांडेय समेत कई आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने प्रभावती देवी को भी हिरासत में ले लिया। अगले दिन प्रभावती पांडेय को अंग्रेज जज के सामने पेश किया गया। जज ने आंदोलनकारियों के नाम बताने और माफी मांगने को कहा, लेकिन प्रभावती देवी ने अपने साथियों का राज खोलने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद दंपती को दो वर्ष की सजा सुनाई गई। वर्ष 1944 में दोनों जेल से रिहा हुए। श्रीराम पांडेय का 7 जुलाई 2025 को 102 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
मधवा पुर गाँव में अब एक मात्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रभावती देवी जीवित सेनानी हैँ। आज देश में स्वतंत्रता दिवस की धूम है। राष्ट्र के प्रति सम्मान का दिवस है। आईये कुछ पल निकाल कर मधवा पुर चलें। प्रभावती ताई को भी प्रणाम कर लें। उनका भी जीवित स्थिति में सम्मान कर लें। प्रभावती पांडेय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहीं और करीब दो वर्ष जेल में रहीं। इनका जीवन देश की आजादी के लिए त्याग, साहस और प्रतिबद्धता की मिसाल रहा है।



