डी एफ ओ ने अपने आवास पर अंतर-विभागीय प्रशिक्षण किया आयोजित।

स्वाभिमान जागरण संवाददाता महाराजगंज।
महराजगंज वन्यजीव संरक्षण – अधिनियम 1972 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा वन्यजीव अपराधों की रोकथाम को लेकर मंगलवार को डीएफओ निरंजन सुर्वे के आवास परिसर – में एक दिवसीय अंतर विभागीय – प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया वन्यजीवों एवं उनके अंगों की तस्करी की आशंका को देखते हुए सभी संबंधित एजेंसियों के बीच नियमित सूचना आदान-प्रदान और संयुक्त कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए प्रत्येक विभाग की भूमिका एवं जिम्मेदारियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।प्रशिक्षण का उद्देश्य वन्यजीव तस्करी एवं अवैध शिकार जैसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), पुलिस विभाग, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) तथा वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के प्रमुख प्रावधानों, वन्यजीव अपराधों की पहचान, साक्ष्य संकलन, तस्करी के बदलते तरीकों तथा संयुक्त अभियान की रणनीतियों पर विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि भारत नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में प्रतिभागियों को वास्तविक घटनाओं के उदाहरणों के माध्यम से वन्यजीव अपराधों की जांच, अभियोजन प्रक्रिया तथा अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई के संबंध में भी प्रशिक्षित किया गया। साथ ही भविष्य में संयुक्त अभियान चलाकर वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने का संकल्प लिया गया। अधिकारियों ने कहा कि वन्यजीवों का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी सुरक्षा एवं प्रवर्तन एजेंसियों की साझा जिम्मेदारी है। समन्वित प्रयासों से ही वन्यजीव तस्करी और अवैध शिकार जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। प्रशिक्षण के अंत में सभी प्रतिभागियों ने वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए संयुक्त रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।


