…तो क्या किसी गाँव से जुड़े आर्थिक कदाचार के मामले की जांच कराना बीडीओ पर पड़ा भारी
नेताओं द्वारा शासन में शिकायत पर हुए आफिस अटैच


स्वाभिमान जागरण देवरिया। यूपी के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ जीरो टालरेंस चाहते हैँ, लेकिन ग्राम्य विकास विभाग में किसी भ्र्ष्टाचार की यदि जांच कोई अधिकारी करायेगा तो उसे कुर्सी से हाथ धोना पड़ेगा? कोई जनप्रतिनिधि चाहेगा कि मामला मैनेज हो जाय और अधिकारी अपनी ईमानदारी को लेकर अड़ा रहेगा तो स्थितियाँ अधिकारी के लिए ही भारी पड़ेगी। कुछ ऐसे ही हालातों के बीच सलेमपुर के बीडीओ को तुरंत पद से हटा कर ग्राम्य विकास विभाग के लखनऊ दफ्तर में अटैच करा दिया गया है। शासन से हुए इस स्थानांतरण के बाद देवरिया में विकास विभाग से लेकर गाँवों तक चर्चा -कुचर्चा का दौर जारी है। सवाल यह है कि जिस जाँच को लेकर बीडीओ अड़े थे, उनके जाने के बाद जांच जारी रहेगी या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

बताते चलें कि प्रशासनिक आधार पर सलेमपुर के बीडीओ रमेश दत्त मिश्र को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा कर ग्राम विकास विभाग ने लखनऊ आयुक्त कार्यालय से संबद्ध कर दिया है। विकास विभाग की ओर से जारी आदेश के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से लखनऊ स्थित आयुक्त, ग्राम विकास कार्यालय से संबद्ध किया गया है। उन्हें नई तैनाती स्थल पर तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। बीडीओ के अचानक स्थानांतरण की खबर सामने आने के बाद सलेमपुर विकासखंड में ही नहीं समूचे जिले में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि शासन के आदेश में स्थानांतरण का आधार प्रशासनिक बताया गया है।
बीडीओ रमेश दत्त मिश्रा के अचानक हुए इस तबादले को लेकर विकास विभाग में भी बड़ी चर्चा है। सलेमपुर विधान सभा में तो इस मामले को कई तरह की बातें सामने आ रहीं। कहा जा रहा कि पिछले साढ़े चार साल में एक ब्लाक में अपने मन माफिक काम नहीं होने पर 8 से दस बीडीओ तक बदल दिये गए।



