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ट्रॉफी साथ जीती, सफर भी साथ शुरू किया, घर पहुंचेगीं अलग -अलग अर्थियां

लार क्षेत्र के दो होनहार हादसे में हुए शिकार

 

लार क्षेत्र के दो जिगरी दोस्त खेल के मैदान से मौत के सफर पर हुए रवाना, जीत की तस्वीर बनी आखिरी याद
एनडी देहाती / स्वाभिमान जागरण
लार। दोस्ती ऐसी कि खेल का मैदान हो या जिंदगी का सफर, दोनों कदम से कदम मिलाकर चलते थे। लखनऊ में क्रिकेट प्रतियोगिता खेलने गए लार क्षेत्र के चुरिया निवासी अनिकेत सिंह और कोहरा निवासी आनंद यादव ने प्रतियोगिता में ट्रॉफी जीती। जीत की खुशी में दोनों ने साथ खड़े होकर फोटो खिंचवाई। चेहरे पर जीत की मुस्कान थी और आंखों में भविष्य के सपने। इसके बाद साथी खिलाड़ियों के साथ एक ही कार से घर लौटने के लिए रवाना हुए। किसी को क्या पता था कि यह सफर दोनों की जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।
बुधवार सुबह सुल्तानपुर-अयोध्या के बीच पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर उनकी कार आगे चल रहे ट्रक से जा टकराई। हादसा इतना भीषण था कि कार सवार चार लोगों की मौत हो गई। इनमें लार क्षेत्र के दो होनहार युवा खिलाड़ी अनिकेत सिंह और आनंद यादव भी शामिल थे। कुछ घंटे पहले तक जो दोनों दोस्त जीत की ट्रॉफी के साथ एक-दूसरे की खुशी बांट रहे थे, हादसे के बाद उनकी देह अलग-अलग घरों के लिए रवाना हुई।
जीत की तस्वीर बनी दोस्ती की आखिरी निशानी
चुरिया निवासी अनिकेत सिंह ने टेनिस के खेल में अपनी अलग पहचान बनाई थी। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड समेत कई राज्यों में आयोजित प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर वह कई मेडल जीत चुके थे। खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने और नाम कमाने का सपना उनकी आंखों में था। वहीं कोहरा निवासी 23 वर्षीय आनंद यादव के लिए क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, जुनून था। दोनों युवाओं की दोस्ती भी खेल के मैदान से ही गहरी हुई थी।
प्रतियोगिता में जीत के बाद साथ खिंचवाई गई तस्वीर अब दोनों परिवारों के लिए दोस्ती और खुशी की आखिरी याद बन गई है। तस्वीर में दोनों के चेहरों पर जीत की मुस्कान है, लेकिन अब वही तस्वीर परिजनों की आंखों में आंसू ला रही है।
एक साथ निकले थे, अलग-अलग घरों में पहुंचीं खबरें
अनिकेत दो भाइयों में बड़े थे। छोटे भाई अंकित सिंह और बहनें रिया सिंह व रिशु सिंह हैं। पिता अमरजीत सिंह सरकारी भट्ठी पर सेल्समैन का काम करते हैं। बेटे की मौत की खबर मिलते ही वह रोते-बिलखते सुल्तानपुर के लिए रवाना हो गए। अनिकेत की मां रंभा देवी की तबीयत मंगलवार से ही खराब बताई जा रही है।
वहीं आनंद यादव तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे। बड़ा भाई विदेश में रहता है, जबकि छोटा भाई पढ़ाई कर रहा है। उनकी दो बहनों की शादी हो चुकी है। आनंद अभी अविवाहित थे। परिवार को उनसे भविष्य की बड़ी उम्मीदें थीं। क्रिकेट में आगे बढ़ने का जुनून उन्हें लगातार मैदान तक खींच ले जाता था।
बुधवार सुबह हादसे की खबर घर पहुंची तो दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। जिस जीत की ट्रॉफी के साथ दोनों दोस्त घर लौटने वाले थे, उसी सफर में मौत ने उन्हें हमेशा के लिए जुदा कर दिया। दोस्ती की कहानी का सबसे दर्दनाक अध्याय यह रहा कि दोनों ने जीत साथ देखी, सफर साथ शुरू किया और अब दोनों की अंतिम विदाई  अलग -अलग होगी।

 

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