इंस्पेक्टर की कार्य संस्कृति, ऑन द स्पॉट रिपोर्टिंग
अपना थाना लार

इंस्पेक्टर की कार्यसंस्कृति, ऑन द स्पॉट रिपोर्टिंग
स्वाभिमान जागरण संवाददाता
देवरिया। सोमवार का दिन। स्थान -लार थाना। गुनगुनाती धूप। परिसर में चार अलग – अलग टेबल। मुख्य टेबल सम्हाल रहे प्रभारी निरीक्षक लार उमेश चंद वाजपेई। उनके वाई बगल टेबल सम्हाल रहे उपनिरीक्षक संतोष यादव। बगल में ही एसएसआई राम बच्चन यादव। सभी के सामने कुछ फाइलें, डायरी और सरकारी दस्तावेज। सभी अपने काम में मशगूल। मातृ शक्तियों के लिए महिला सिपाही का गोलंबर में एक अलग टेबल।
साढ़े दस बजे से फरियादियों का आना शुरू। जमीन को लेकर ही ज्यादातर विवाद सामने आ रहे। एक फरियादी की जमीन का हिस्सा उसी का भाई जबरिया जोत रहा। सबसे सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय। पांच भाई हो , तो जो भाई अपना हिस्सा दिया हो उसे जीतो, जिस भाई को एतराज है उसकी जमीन जबरिया मत जोतो। नहीं मानोगे तो केस दर्ज कर जेल भेज देंगे। फरियादी का भाई तैयार हो गया, जमीन छोड़ देंगे। दोनों खुशी खुशी समझौता पत्र लिखकर थाने से चले गए।
दूसरा मामला। किसी मामले में आरोपी के बहनोई आते हैं। गले में केसरिया गमछा। बात चीत से लगा कि सत्ताधारी दल से जुड़े होंगे और सलेमपुर से ही परिचित होने जैसा लग रहा है। अपनी बात शुरू करते हैं। इंस्पेक्टर पूरा मामला समझते हैं। उन्हें बता देते हैं, यह सीओ स्तर का मामला है। इसमें हम कुछ नहीं कर सकते, आप सीओ साहब से मिलकर अपनी बात बताएं, जो कुछ होगा उन्हीं के स्तर से होगा।
तीसरा मामला, वादिनि के यहां पुलिस भेजी गई। दोनों पार्टी थाने पर तलब। दोनों ने अपनी अपनी बात रखी। मामला जमीन से संबंधित। इंस्पेक्टर का सुझाव , लेखपाल बुलवा कर नपवा लो।
अगला स्टेप, सामने कुछ बाँछितों की सूची। उपनिरीक्षकों को नाम लेकर संबोधित करते हुए, आप अमुक गांव जाएं, आप इस मामले में देखें। आप इसे पकड़ कर न्यायालय भेजिए, आप ….। इसी प्रकार कई निर्देश। कई फरियादियों को त्वरित न्याय। सिपाहियों को संकेत, देखो उसके साथ कोई दलाल आया है तो उसे पकड़ कर लाओ। सीधी सपाट बात। फरियादी अपनी बात स्वयं बताए। यह कचहरी नहीं है कि किसी वकील की जरूरत है।
इस बीच तीन -चार मीडियाकर्मी भी बारी – बारी पहुंच गए। कुछ चुहल। कुछ चर्चा। कुछ तर्क। अन्दर साफ पीड़ा भी झलक रही, भूमि विवादों को लेकर अधरों तक शब्द भी आ ही जाते हैं, सलेमपुर में मेरा क्या कसूर था?
फिर अगले फरियादी की बात…। लगातार। सुनना। समझना। फिर समझाना। कुछ यही कार्य संस्कृति है लार के प्रभारी निरीक्षक उमेश चंद वाजपेई के।
(जो दिखा, सो लिखा)
खुशी की बात यह कि हर गतिविधियां थाने के सीसीटीवी कैमरे में भी लगातार कैद हो रही।



