
जब 25 जनवरी को जिला बदर हुआ था गैंग का सरगना तो 26 जनवरी को लार में घटना कैसे किया?
जब गैंग 302 के 10 लोग मंगलवार को हिरासत में लिए गए तो दो का ही 151 में चालान क्यों?
घटना 26 जनवरी को घटी तो मुकदमा तीन फरवरी को क्यों लिखा गया?
वायरल वीडियो में जो शस्त्र दिखे, उन्हें बरामद क्यों नहीं किया गया?
सवाल तो बहुत हैं? जबाव जिम्मेदारों को ही देना है। देवरिया के एसपी विक्रांत वीर की कई नई योजनाएं बेहतर पुलिसिंग के लिए अमल में लाई गईं है। कप्तान की जो योजनाएं अमल में लाई गई हैं उनमें मॉर्निंग वॉक से लेकर रात्रि गश्त तक को जो शेड्यूल है उसके हिसाब से तो हर समय पुलिस कहीं न कहीं सक्रिय ही रहती होगी। फिर भी कुछ मनबढ़ों को यदि पुलिस का और कानून का भय नहीं है तो अपराध की इस नई पौध को पुष्पित पल्लवित होने का जो अवसर मिल रहा है वह काफी चिंतनीय और समाज के लिए घातक है। लार में एक एक बाइक पर सवार चार चार युवक सड़कों पर हुड़दंग मचाते हैं। पुलिस पकड़ती है तो कुछ लोग छुड़ाने भी पहुंच जाते हैं। 26 जनवरी की घटना के बाद पुलिस ने अपने तेवर दिखाए। चनुकी मोड पर हुड़दंगियों को दौड़ाकर पकड़ने में लार के इंस्पेक्टर उमेश कुमार वाजपेई भी चोटिल हुए थे। न जाने किस वजह से उस दिन केस नहीं दर्ज हुआ था। यह केस तीन फरवरी को तब दर्ज हुआ जब उसी गैंग 302 के किसी सदस्य ने अराजकता का वह वीडियो वायरल कर दिया। पुलिस तेज हुई। धर पकड़ जारी हुई। शाम तक दस लोग हिरासत में ले लिए गए। बाल सुधार गृह की जगह मनबढ़ किशोर पकड़े जाने के बाद क्यों छोड़ दिए गए? मामले में झोल तो बहुत है साहब! कैसे कोई अपराधी 25 जनवरी को जिला बदर हो गया था तो 26 जनवरी को लार में अपराध करने पहुंच गया। इसकी भी जांच जरूरी है। यह लार है साहब! देवरिया में रफ्तार गैंग की रफ्तार इसी लार में पूर्व प्रभारी निरीक्षक और मौजूदा पीआरओ कपिलदेव चौधरी ने हाफ इनकाउंटर कर के कम कर दिया था।



