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तीन सिपाही तेरह गांव, कैसे चेकिंग सुबहो शाम

बार्डर चौकी पर सिपाहियों की कमी से धरातल पर विभाग की मंशा के अनुरूप नहीं हो रहा कार्य

 

सिपाहियों की कमी व संसाधनों के अभाव में यूपी -बिहार बार्डर की संवेदनशील चौकी

18 मार्च से तैनात है यहां डेढ़ सेक्शन पीएसी

पांडे एन डी देहाती / स्वाभिमान जागरण

देवरिया। यूपी -बिहार बार्डर पर लार थाना की एक मेहरौना चौकी है। इस चौकी पर सिपाहियों की कमी है। यहां मात्र तीन सिपाही कार्यरत हैं। पूर्व में यहां पर्याप्त सिपाही रहते थे। धीरे धीरे कटौती करते करते अब यहां तीन सिपाही ही बचे हैं। मेहरौना चौकी के अंदर कुल 13 गांव हैं। कई बड़े गांव हैं। मेहरौना स्वयं में साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील बाजार है। मेहरौना चौकी क्षेत्र शराब तस्करी, गो वंश तस्करी के लिए कुख्यात है।
एक तरफ सरकार मजबूत कानून व्यवस्था का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ पर्याप्त पुलिस बल नहीं तैनात करती है। यूपी- बिहार बार्डर पर स्थित मेहरौना चौकी की स्थिति काफी खराब है। यहां सभी वाहनों की चेकिंग करने का बहुत पहले से ही निर्देश है। पुलिसकर्मियों की कमी के चलते चेकिंग के दौरान ही गत 17 मार्च को पुलिस टीम पर अराजक तत्वों ने हमला कर दिया था। यदि यहां पहले से पर्याप्त पुलिस बल रहता तो पुलिस पर हमला नहीं हुआ होता। पुलिस टीम पर हमला के बाद यहां 18 मार्च से ही डेढ़ सेक्शन पीएसी लगा दी गई। पीएसी आज भी है। पीएसी की वजह से चौकी की सुरक्षा तो है, लेकिन लोकल पुलिस की कमी से अन्य कार्य बाधित या प्रभावित हैं। मात्र तीन सिपाही हैं। तेरह गावों की सुरक्षा वयवस्था देखनी है। ग्रामीणों की शिकायत पर पहुंचना है। दो बैंक है उनकी सुरक्षा ड्यूटी करनी है। नोटिस तामील कराना है। वारंटी पकड़ना है। लड़कियां भाग रहीं उन्हें बरामद करना है। शराब जांच करनी है। गो वंश तस्करी रोकनी है। अब भला आप बताएं क्या धरातल पर तीन सिपाही वास्तव में इन कामों को संपादित करते होंगे। यदि चौबीस घंटे लोकल पुलिस की सेवा सही सलामत लेनी है तो कम से कम तीन सिपाही पुलिस प्रशासन को बढ़ा देना चाहिए। पूर्व पुलिस अधीक्षक श्रीपति मिश्र के कार्यकाल में बार्डर से बिहार जाने वाले सभी छोटे बड़े वाहनों की जांच के बाद ही आगे जाने की इजाजत मिलती है। चौबीसों घंटे, सातों दिन की यह गतिविधि है। यही कारण है इस चौकी से सबसे ज्यादा शराब बरामद हुई जो अवैध ढंग से बिहार जाती रही। इन दिनों सिपाहियों की कमी से व्यवहारिक धरातल पर कठिनाई के चलते बरामदगी भी कम हो रही है।

चौकी पर अराजक तत्वों के हमला के बाद पीएसी तो विशेष परिस्थितियों में पुलिस की मदद में लगाई गई। जो आज भी है। पीएसी तो पुलिस के सहयोग में है, थाने के सरकारी काम तो लोकल पुलिस को ही करने हैं। पुलिस अधीक्षक को चाहिए कि मेहरौना बार्डर के इस अति संवेदनशील पुलिस चौकी पर सिपाहियों की संख्या बढ़ाएं।

 

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