पत्रकार संतोष विश्वकर्मा के संघर्ष का परिणाम, कई अधिकारियों को नोटिस
गोरखपुर में विकलांगों पर हुआ था लाठीचार्ज

स्वाभिमान जागरण संवाददाता
देवरिया। देवभूमि देवरिया के युवा पत्रकार संतोष विश्वकर्मा का संघर्ष रंग लाया। गोरखपुर में पूर्व में विकलांगों पर लाठी चार्ज हुआ था। घटना के समय मौके पर उपस्थित देवरिया टाइम्स के पत्रकार संतोष विश्वकर्मा ने अपने पत्रकारिय धर्म का निर्वहन करते हुए वीडिओ बनाना शुरू किए। प्रशासन ने उन्हें न सिर्फ वीडिओ बनाने से रोका बल्कि उनके साथ दबंगई दिखाने का प्रयास किया। पत्रकार संतोष विश्वकर्मा अपने मार्ग से विचलित नहीं हुए। खबर कवर किए। पूरी खबर चलाये। उन्होंने इस मामले को मानवाधिकार आयोग और भारतीय प्रेस परिषद तक पहुंचाया।भारतीय प्रेस परिषद ने केस संख्या – 130/2024/बी.पी.सी.आई. के तहत, 2 जून 2025 को उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, समते चार अधिकारियों को नोटिस जारी कर 15 दिन के अंदर मांगा जवाब माँगा है। आरोप है कि दिव्यांगों पर लाठी चार्ज के वक़्त खबर कवर कर रहे पत्रकार संतोष विश्वकर्मा के साथ गोरखपुर डीएम दफ्तर में अधिकारियों व कर्मचारियों ने दुर्व्यवहार किया था। भारतीय प्रेस परिषद ने मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, सचिव, गृह विभाग, उत्तर प्रदेश शासन,पुलिस अधीक्षक, उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय, गोमती नगर, लखनऊ,विनीत कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी (वित्त व राजस्व), जनपद को दिनांक 2 जून 2025 को जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि क्यों न इस प्रकरण में प्रेस परिषद अधिनियम 1978 की धारा 13(1) और धारा 15(4) के अंतर्गत कार्रवाई प्रारंभ की जाए। उन्हें 15 दिन के भीतर तीन प्रतियों में अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है, साथ ही शिकायतकर्ता को भी उसकी एक प्रति भेजने की बाध्यता रखी गई है। बताते चलें कि राज्य मानवाधिकार द्वारा जब सुनवाई को लेकर गोरखपुर डीएम को नोटिस दिया उसके बाद, ADM वित्त और राजस्व गोरखपुर विनीत कुमार सिह का तबादला गाजियाबाद कर दिया गया था। ताज्जुब की बात है कि पत्रकारों के दर्जन भर संगठन हैं, जो आये दिन पत्रकार हित का दम्भ भरते हैं, लेकिन किसी संगठन ने संतोष विश्वकर्मा से हुए दुर्व्यवहार के मामले में कहीं कोई कोई धरना प्रदर्शन नहीं किया। संतोष ने अपनी लड़ाई स्वयं लड़ी।



