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यूपी का नंबर वन अस्पताल : लाइट न डाक्टर कोख में मर गयी बच्ची

प्रसव के दौरान मृत बच्ची पैदा हुई इसमें किसी का कसूर नहीं :अधीक्षक

स्वाभिमान जागरण संवाददाता

देवरिया। जो दावे थे समय के गर्त में दफ़न हो गए। यूपी नंबर वन का तमगा पाने वाला सरकारी अस्पताल समय के साथ बदहाल हो गया। यह सही है कि डॉ बीवी सिंह के कार्यकाल में अस्पताल का कायाकल्प हुआ, लेकिन मंगलवार को प्रसव के एक मामले में घोर लापरवाही और गुमराह करने वाले बयान ने न सिर्फ एक परिवार की खुशियाँ कोख में ही मार दी बल्कि अस्पताल के उन हर प्रसंशकों को सोचने पर विवश कर दिया कि आखिर क्या कारण था कि अस्पताल में न प्रकाश की व्यवस्था थी न डाक्टर था और नर्स ने बेरुखी से बोल दिया लाइट पंखा नहीं है तो किसी बड़े अस्पताल में चले जाओ। पूरे घटना क्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चारों तरफ थू थू मची है। अब सभी कह रहे हैं क्या यही नंबर वन वाला अस्पताल है?

देवरिया जिले के लार स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जिसका यूपी का टॉप तीन अस्पतालों में शुमार था, कुछ स्वाशथ्यकर्मियों के चलते अस्पताल की साख पर बट्टा लग गया है । 22 जुलाई को सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक वीडियो ने अस्पताल की पोल खोल कर रख दी। मामला लार क्षेत्र के मटियारा जगदीश निवासी सब्बो खातून पत्नी मोहम्मद राज के प्रसव से जुडा हुआ है। परिजन उसे प्रसव पीड़ा होने पर  22 जुलाई को 11 बजे सामुदायिक स्वाशथ्य केंद्र लार लेकर पहुंचे। पहला प्रसव था इसलिए सभी सतर्क थे। आवश्यक जाँच आदि कराने के बाद बताया गया कि सब कुछ नार्मल है, अभी प्रसव में समय है। शाम 6:00 बजे तक सब कुछ नार्मल था। रात को लगभग 8:00 जब गर्भवती दर्द से कराहने लगी तो 30 शैया के इस अस्पताल  में लाइट और पंखा के अभाव मे डाक्टर की अनुपस्थिति में मृत बच्ची पैदा हुई। तब नर्स ने बताया कि ये बच्ची पांच घंटे पहले ही मां के गर्भ में ही मर चुकी थी। स्टॉफ नर्स के विरोधाभासी बयान जिसमें पहले कहा गया सब कुछ नार्मल है और फिर कहा गया कि पांच घंटे पहले ही कोख में बच्ची मर गयी थी, इस बात को लेकर अस्पताल में परिजनों ने हँगामा करना शुरू कर दिया।कुछ देर हो हल्ला करने के बाद परिजन मृत बच्ची को लेकर दफन करने घर आ गए। घर से वापस अस्पताल गए तो सब्बो का ब्लडिंग शुरू हो गया था यह भी नर्स की लापरवाही के कारण ही हुआ। जब परिजनों ने नर्स से पूछा तो नर्स रेफर करने की बात कहने लगीं। 12 बजे के आस पास आनन फानन में परिजन प्राइवेट गाड़ी से अपने मरीज को लेकर देवरिया के एक निजी हॉस्पिटल पहुंचे जहां तीन यूनिट ब्लड चढ़ाया गया तब जाकर प्रसूता की जान बची। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कोई जिम्मेदार डॉक्टर राउंड पर नहीं पहुंचा बेतहाशा गर्मी में 30 शैय्या के अस्पताल में मरीज के साथ साथ परिजन भी परेशान रहे। कुछ लोग अपने घर से इमरजेंसी लाइट लाकर रोशनी का प्रबंध किए हुए थे और गमछे से अपने मरीजो को हवा कर रहे थे।

इस संबंध में अस्पताल के अधीक्षक डॉ बीवी सिंह से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि मरी बच्ची पैदा हुई तो इसमें किसी का कसूर नहीं है। ब्लीडिंग क्यों नहीं बंद हुई इसकी जाँच की जायेगी। यदि किसी स्टॉफ का दोष  सामने आएगा तो कार्रवाई की जाएगी।

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