12 रबीउल अव्वल के मौके पर निकला जुलूसे मोहम्मदी, सजाया गया जलसा
सलेमपुर, मेहरौना, मझौली, पिंडी आदि गांवों में निकाला गया जुलूसे मोहम्मदी

स्वाभिमान जागरण संवादाता
देवरिया इस्लाम धर्म के पैगम्बर हजरत मोहम्मद स०अ०व० के पैदाइश के मौके पर सलेमपुर सहित आस पास के गांवों में जुलूसे मोहम्मदी निकाला गया। हर साल की तरह इस साल भी मेहरौना फतेहबाग पिंडी आदि जगहों पर भी जुलूस निकालकर मुस्लिम समुदाय के लोग हजरत मोहम्मद स०अ०व० के जन्मदिन की खुशी मनाते नज़र आए।
अरबी कैलेंडर के अनुसार इस्लाम धर्म में 12 रबीउल अव्वल की तारीख का बड़ा महत्व है। इस दिन को बड़ा ही अज़मत वाला दिन माना जाता है।
क्योंकि इसी रबीउल अव्वल के महीने में 12 तारीख को हजरत मोहम्मद स०अ०व० मक्का के धरती पर पैदा हुए। और वहीं से पुरी दुनिया को अमन का पैगाम दिया।
यही कारण है कि इस्लाम धर्म के मानने वाले लोग इस दिन को बड़ा ही बरकत वाला दिन मानते हैं। इस दिन बड़े धूमधाम से रात में जलसा सजाया जाता है और फिर दिन में जुलूसे मोहम्मदी निकली जाती है।
बीती रात रामनगर व मटियारा जगदीश सहित आस पास के कई गांवों में जलसा सजाया गया जलसे में रसूले पाक स०अ०व० की जीवनी पर प्रकाश डाला गया।
जलसे में तक़रीर करते हुए मौलाना अख्तर रज़ा साहब ने बताया कि मेरे नबी स०अ०व० की पैदाइश से पहले जिहालत का दौर था लोग बच्चीयों को जिंदा जमीन में दफन कर दिया करते थे। तरह तरह के कुरीतियों और बुराइयों का बोल बाला था। लेकिन जब पैग़म्बरे इस्लाम इस दुनियां में तशरीफ़ लाए तो औरतों को सम्मान दिलाया, महिलाओं को उनका अधिकार दिलाया और सारे कुरीतियों और बुराइयों का अंत किया।



