अब्दुल गनी शाह मजार : तत्कालीन कानूनगो -लेखपाल – मजार कमेटी के पदाधिकारियों पर केस दर्ज
क्षेत्रीय लेखपाल की तहरीर पर कोतवाली में दर्ज हुआ धोखाधड़ी व जालसाजी का मामला

स्वाभिमान जागरण देवरिया
आख़िरकार सदर विधायक डॉ शलभ मणि त्रिपाठी की वह भी मांग आज पूरी हो गयी जिसमें उन्होंने कहा था कि मजार मामले में दोषी लोगों के विरुद्ध केस दर्ज कर कार्रवाई हो। क्षेत्रीय लेखपाल विनय कुमार सिंह की तहरीर पर देवरिया कोतवाली में तत्कालीन कानूनगो, तत्कालीन लेखपाल व मजार कमेटी के विरुद्ध जालसाजी, धोखाधड़ी का केस दर्ज हो गया।
जिला प्रशासन के निर्देश के बाद क्षेत्रीय लेखपाल विनय कुमार सिंह ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया कि देवरिया के राजस्व ग्राम मेहडा तप्पा धतुरा परगना सिलहट में स्थित आराजी संख्या 1647/2 मि0 जो की देवरिया कसया बाईपास के बगल स्थित बेश कीमती भूमि है पर कूटरचित तरीके से वक्फ मजार/कब्रिस्तान का नाम दर्ज करा लिया गया था उक्त प्रकरण की जांच नायब तहसीलदार देवरिया सदर की अध्यक्षता में गठित टीम द्वारा किया गया । जांच में यह पाया गया कि प्रशनगत आराजी संख्या 1647/2मि0 पट्टी सरकार बहादुर कैसरे हिन्द (नान जेड ए) की भूमि है जिसमें रकवा-0.426 हे0 बंजर के नाम दर्ज था। वर्ष 1993 में प्रश्नगत आराजी पर अनुचित लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से तत्कालीन अब्दुल गनी शाह मजार कमेटी के सदर शहाबुद्दीन सजग, नायब सदर इरसाद अहमद, नाजिम मुबारक अली नायब नाजिर अखतर वारसी ने तत्कालीन रजिस्टार कानूनगो राधेश्याम उपाध्याय एवं तत्कालीन क्षेत्रीय लेखपाल रामानुज सिंह को साथ मिलाकर उक्त बंजर आराजी के रकवा-0.124 हे0 पर कुटरचित तरीके से राजस्व अभिलेख में छेडछाड कराकर वक्फ मजार/कब्रिस्तान का नाम दर्ज करा लिया गया। उक्त कूटरचित इन्द्राज के विरुद्ध न्यायालय 4 N.C.R.B (एन.सी.आर.बी) उपजिलाधिकारी प्रथम देवरिया के समक्ष अन्तर्गत धारा 31/32 30प्र0 सरकार बनाम प्रबन्धक मजार/कब्रिस्तान कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या-T202505200122428 योजित किया गया जिससे न्यायालय द्वारा पक्षो को सुनते हुए दिनांक 19.11.2025 को उक्त इन्द्राज को कुटरचित रुप से अंकित पाते हुए निरस्त कर दिया गया है। इस प्रकार उक्त आदेश दिनांक 19.11.2025 के द्वारा भी उपरोक्त व्यक्तियों द्वारा राजस्व अभिलेख में फर्जी इन्द्राज दर्ज करने की पुष्टि होती है।
कोतवाली पुलिस ने लेखपाल की तहरीर पर केस दर्ज कर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की पुरानी धाराओं 420, 467, 468, 471 व 120-B के तहत केस दर्ज की है।
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