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जाति -क्षेत्र -भाषा के नाम पर बँटने से देश कमजोर होता है : योगी आदित्यनाथ

जालोर स्थित श्रीरत्नेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार को आयोजित महायज्ञ एवं धर्मसभा में बोले यूपी के मुख्यमंत्री

पांडे एन डी देहाती /स्वाभिमान जागरण

जालोर (राजस्थान )। सोमवार को यूपी के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ ने जोधपुर संभाग के जालोर स्थित सिरे मंदिर में रतनेश्वर महादेव की 375 वीं वर्षगांठ पर आयोजित यज्ञ में पूर्णाहुति दी। यहां आयोजित धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रवाद का सन्देश दिया।कहा कि पिछली सरकारों ने समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बांटने का काम किया, जिससे देश कमजोर हुआ और कश्मीर से लेकर नक्सलवाद तक की समस्याएं पनपीं. उन्होंने आरोप लगाया कि इन सरकारों ने गरीबों, दलितों और पिछड़ों को शासन की सुविधाओं से वंचित रखा। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहाँ कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश एक सूत्र में पिरोया गया है।  उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने न केवल कश्मीर और नक्सलवाद जैसी गंभीर चुनौतियों का समाधान निकाला, बल्कि विकास के साथ-साथ सनातन आस्था के सम्मान को भी प्राथमिकता दी।जालोर स्थित श्रीरत्नेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार को आयोजित महायज्ञ एवं धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत ने दुनिया को जीने की कला सिखाई। जीवन कैसे जिया जाता है, इसीलिए दुनिया के अंदर भारत एकमात्र देश है, जिस देश के बारे में कहा जा सकता है कि यह देश बना है ऋषि-मुनियों की साधना से. वीर और वीरांगनाओं के बलिदान से. अन्नदाता किसानों के परिश्रम से. कारीगरों की उद्यमिता से. हस्तशिल्पियों के हस्तशिल्प से और श्रमिकों के पसीने से इस देश का निर्माण हुआ है, इसलिए दुनिया की कोई भी ताकत भारत के सामने ठहर नहीं सकती।योगी ने आगे कहा कि पिछली सरकारें आस्था का अनादर करती थीं, भारत की आस्था, सनातन की आस्था को अंधविश्वास और रूढ़िवाद मानती थीं, लेकिन मोदी सरकार ने तय किया कि सनातन की आस्था ही भारत की आस्था है. बिना आस्था के कोई समाज आगे नहीं बढ़ सकता।  योगी ने कहा अयोध्या में राममंदिर का निर्माण तो आजादी के तुरंत बाद हो सकता था, लेकिन सरकारें उलटी पैरवी करती थीं। राम को काल्पनिक बताने लगीं। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के अंदर अलग क्यों है? हमें इसे समझना होगा और इसे समझने के लिए हमारे पर्व, हमारे त्योहार, हमारी परंपराएं, ऋषि-मुनि, विद्वान, सैनिक, किसान, नौजवान, समाज की आधी आबादी बहनों और बेटियों का, माताओं का योगदान, इन सब की इस विशिष्ट मान्यतायें हैं, हमारे पास एक लंबी विरासत है, एक लंबी परंपरा है. कोई न कोई सनातन धर्मावलंबी किसी न किसी ऋषि के साथ अपना गोत्र जोड़ता है, ऐसा और कहीं नहीं है।

धर्म संसद में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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