गैस की सीमित आपूर्ति से प्रदेश में बच्चों की मिड डे मील योजना संकट में।
संजय मणि त्रिपाठी ने की स्पष्ट आदेश की मांग, ताकि विद्यालयों में सुचारू रूप से गैस की आपूर्ति हो सके।

स्वाभिमान जागरण संवाददाता महराजगंज।
महाराजगंज जनपद सहित प्रदेश के समस्त विद्यालयों में सरकार द्वारा चलाए जा रहे मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम में गैस की अनुपलब्धता धीरे धीरे बड़ी समस्या बनती जा रही है, जहां जिलाधिकारी के आदेश के बावजूद एजेंसी मालिकों द्वारा विद्यालयों को सिलिंडर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
विगत दिनों शुरू हुए इराक इजरायल युद्ध के परिणाम स्वरूप जनता में भ्रम फैल जाने के कारण गैस एजेंसियों पर लंबी-लंबी लाइन लग रही है और उपभोक्ता गैस लेने को परेशान है। सरकारी फरमान द्वारा व्यावसायिक सिलेंडरों की बिक्री पर अस्थाई रोक के बाद होटल आदि भी बंद पड़े हैं, साथ ही उपभोक्ताओं की लम्बी लाइन लगातार समस्या बढ़ा रही है।
दूसरी तरफ गैस की अनुपलब्धता के कारण बच्चों को निर्धारित समय पर भोजन दे पाना कठिन हो रहा है जिससे विद्यालयों में उपस्थिति भी घट रही है भविष्य में इसका नकारात्मक प्रभाव विद्यालयों में नामांकन पर पड़ना तय माना जा रहा है।
इस समस्या को देखते हुए उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी ने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों यदि समय रहते गैस आपूर्ति का सर्कुलर जारी नहीं किया गया तो विद्यालयों में भोजन बनाने की प्रक्रिया बाधित हो जाएगी। उन्होंने बताया कि अधिक संख्या वाले विद्यालयों में एक गैस सिलेंडर लगभग 10 दिनों तक चल पाता है और विद्यालय लगभग 22 से 24 दिनों तक संचालित होते हैं। ऐसी स्थिति में प्रत्येक विद्यालय को हर महीने दो गैस सिलेंडर कम से कम चाहिए होते हैं परंतु इस समय एक सिलेंडर भी मिलना कठिन हो रहा है। श्री मणि ने प्रशासन से मांग की है कि विद्यालयों में सुचारू भोजन व्यवस्था लिए गैस आपूर्ति नियमित एवं प्रभावी ढंग से किए जाने का स्पष्ट आदेश जारी किया जाए जिससे बच्चों स्वच्छ व पका पकाया भोजन निर्बाध ढंग से मिल सके। श्री त्रिपाठी के अनुसार यदि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मध्यान भोजन हेतु गैस आपूर्ति के लिए विशेष आदेश जारी नहीं किया गया तो यह योजना बंद होने की स्थिति में पहुंच सकती है जिससे ग्रामीण अंचल के बच्चों को भोजन की विकट समस्या का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि जलाने वाली लकड़ी की उपलब्धता कम होने और लकड़ी महंगी होने के कारण सभी जगहों पर इसका उपयोग संभव नहीं हो सकता है।



