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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरेंदा से नवजात बच्ची लापता, अस्पताल में मचा हड़कंप।

नवजात बच्चे को बीस हजार में दूसरे को दिए जाने का मामला।

 

स्वाभिमान जागरण संवाददाता, पुरन्दरपुर, महराजगंज।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) फरेंदा में नवजात बच्ची के लापता होने का मामला सामने आने से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और नवजातों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बताया जाता हैं कि फरेंदा क्षेत्र के ग्राम अगया निवासी उषा, पत्नी स्वर्गीय दुर्गेश, अपने मायके ग्राम शिकारपुर बान्हा से अपनी मां के साथ प्रसव के लिए सीएचसी फरेंदा पहुंची थीं। 13 जुलाई को चिकित्सकों ने ऑपरेशन के माध्यम से बच्ची का जन्म कराया। आरोप है कि जन्म के कुछ समय बाद ही नवजात रहस्यमय परिस्थितियों में अस्पताल से गायब हो गई।परिजनों का आरोप है कि नवजात को मृत बताकर अस्पताल से बाहर ले जाया गया। वहीं पूछताछ के दौरान प्रसूता की मां ने कथित रूप से स्वीकार किया कि बच्ची को दूसरी महिला को सौंप दिया गया था। मामले में यह भी चर्चा है कि गरीबी और पालन-पोषण में असमर्थता के चलते नवजात को 20 हजार रुपये में दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। लेबर रूम प्रभारी एवं ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अस्पताल में नवजात की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं।सीएचसी फरेंदा के अधीक्षक डॉ. एम.पी. सोनकर ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है। उच्च अधिकारियों को घटना से अवगत करा दिया गया है। जांच के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि परिजनों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नवजात के लापता होने के पीछे वास्तविक कारण क्या है और इसमें किसकी जिम्मेदारी बनती है।

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