सावन में बदहाल प्राचीन शिव मंदिर, श्रद्धालुओं की आस्था पर अव्यवस्थाओं का साया

खखरेरू/फतेहपुर सावन माह की शुरुआत के साथ ही जिले के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है। 3 अगस्त को सावन के पहले सोमवार पर बड़ी संख्या में कांवड़ियों और शिवभक्तों के जलाभिषेक के लिए पहुंचने की संभावना है। ऐसे में धाता और विजयीपुर विकासखंड के दो प्राचीन शिव मंदिर अतिक्रमण, गंदगी, जलभराव और बदहाल रास्तों जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गईं तो श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और जलाभिषेक में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
*पौली का 150 वर्ष पुराना शिव मंदिर अतिक्रमण की चपेट में*
धाता विकासखंड के पौली गांव स्थित करीब 150 वर्ष पुराने शिव मंदिर की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार मंदिर परिसर के चारों ओर अतिक्रमण हो गया है तथा चबूतरे पर बकरियां बांधे जाने से धार्मिक स्थल की गरिमा प्रभावित हो रही है। मंदिर के आसपास गंदगी फैली होने से श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ रही है।
बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण लगभग 150 वर्ष पूर्व खैरई निवासी शिवनाथ प्रसाद वैश्य ने कराया था। स्थानीय मान्यता के अनुसार व्यवसाय में सफलता मिलने के बाद उन्होंने भगवान शिव के प्रति आस्था स्वरूप इस मंदिर का निर्माण कराया। सावन और महाशिवरात्रि पर पौली, गढ़वा, सधुवापुर, खैरई सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
*कठारिया का 300 वर्ष पुराना शिव मंदिर भी बदहाली का शिकार*
विजयीपुर विकासखंड के कठारिया गांव स्थित लगभग 300 वर्ष पुराना शिव मंदिर भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। मंदिर तक पहुंचने के लिए मुख्य मार्ग से करीब 50 मीटर कीचड़युक्त रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। मंदिर परिसर में साफ-सफाई, पेयजल, हाथ-पैर धोने और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था का अभाव है।
ग्रामीणों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण करीब 300 वर्ष पूर्व गांव के एक नाई ने कराया था। स्थानीय मान्यता है कि डकैती की एक घटना के दौरान भगवान शिव की कृपा से डकैत रास्ता भटक गए और लूटा हुआ सामान वापस छोड़कर चले गए। इसके बाद आस्था स्वरूप मंदिर का निर्माण कराया गया। वर्तमान में सुरतपुर, कठारिया, तक्कीपुर सहित आसपास के गांवों के श्रद्धालु यहां नियमित रूप से दर्शन-पूजन के लिए आते हैं।
*व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की मांग*
ग्रामीणों का कहना है कि सावन के दौरान इन दोनों प्राचीन मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और कांवड़िये पहुंचते हैं, लेकिन अतिक्रमण, गंदगी, कीचड़ और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से अतिक्रमण हटाने, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था तथा सुगम आवागमन की व्यवस्था कराने की मांग की है।
*संगठन ने दी आंदोलन की चेतावनी*
हिंदू सुरक्षा परिषद एवं बजरंग हिंद के प्रदेश अध्यक्ष रवि पांडे ने कहा कि यदि प्रशासन एक सप्ताह के भीतर पौली स्थित शिव मंदिर से अतिक्रमण नहीं हटवाता और श्रद्धालुओं के लिए सुगम व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करता है, तो संगठन स्वयं अतिक्रमण हटाने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था संबंधी स्थिति की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
उपजिलाधिकारी खागा अश्वनी पांडेय ने बताया कि मामले की जांच करवा कर अतिक्रमण हटवाने का कार्य किया जाएगा।

