वैश्वीकरण, बाजार और हिंदी साहित्य : चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर व्याख्यान आयोजित।

स्वाभिमान जागरण संवाददाता फरेंदा, महाराजगंज।
हिंदी दिवस के अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री स्मारक पीजी कॉलेज, आनंदनगर, महाराजगंज में “वैश्वीकरण, बाजार और हिंदी साहित्य : चुनौतियां एवं संभावनाएं” विषय पर एक महत्वपूर्ण शैक्षिक व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर के हिंदी विभाग के आचार्य प्रोफेसर हरीश कुमार शर्मा ने कहा कि वैश्वीकरण और बाजारवाद के वर्तमान दौर में हिंदी का स्वरूप तेजी से परिवर्तित हो रहा है। हिंदी अब केवल साहित्य और संचार की भाषा न रहकर शिक्षा, मीडिया, विज्ञापन, सिनेमा, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया तथा ई-कॉमर्स के क्षेत्र में भी अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा रही है। वैश्विक बाजार में हिंदी के बढ़ते प्रयोग ने हिंदी साहित्य के लिए नए पाठक, नए माध्यम और नए बाजार उपलब्ध कराए हैं।
उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में हिंदी साहित्य के सामने अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव, बाजार की प्राथमिकताओं, साहित्य की व्यावसायिकता, डिजिटल माध्यम में भाषा की शुद्धता तथा पाठकीय रुचियों में परिवर्तन जैसी अनेक चुनौतियां हैं। इसके बावजूद ई-बुक, ऑडियोबुक, ब्लॉग, वेब पत्रिकाओं और सोशल मीडिया जैसे डिजिटल माध्यम हिंदी साहित्य के प्रसार की व्यापक संभावनाएं प्रस्तुत कर रहे हैं।
व्याख्यान में ‘हिंग्लिश’ के बढ़ते प्रयोग, हिंदी के डिजिटल विस्तार तथा विश्व स्तर पर हिंदी के बढ़ते प्रभाव पर भी चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्रबंधक डॉक्टर बलराम भट्ट ने कहा कि हिंदी को आधुनिक तकनीक और बाजार की आवश्यकताओं के साथ जोड़ते हुए उसकी मौलिकता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक अस्मिता को सुरक्षित रखना समय की आवश्यकता है। आज जरूरत इस बात की है कि हिंदी को वैश्विक स्तर पर मजबूत किया जाए। यह तभी हो सकता है जब हम ईमानदारी से हिंदी का प्रयोग करें साथ ही हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिले।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राम पाण्डेय ने कहा कि हिंदी को वैश्विक भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए साहित्यकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, प्रकाशकों और डिजिटल माध्यमों को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि हिंदी की शक्ति उसकी व्यापक जनस्वीकार्यता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा और बदलते समय के साथ स्वयं को ढालने की क्षमता में निहित है।
कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ मनोज कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन शिक्षा शास्त्र विभाग की सहायक आचार्य डॉ बाल गोविंद मौर्य ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी शिक्षकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं संवर्धन के संकल्प के साथ हुआ।



