कानून का गला घोंटता ओवरलोड परिवहन, सिस्टम मौन

खखरेरू/फतेहपुर जनपद में ओवरलोड परिवहन अब सिर्फ एक अव्यवस्था नहीं बल्कि खुला अवैध कारोबार बन चुका है। रात्रि के अंधेरे में बिना किसी भय के सड़कों पर दौड़ते ओवरलोड वाहन यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि आखिर कानून का डर खत्म कैसे हो गया?
प्रशासन द्वारा प्रत्येक थाना क्षेत्र में ओवरलोड परिवहन रोकने के लिए गठित की गई टास्क फोर्स सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है। जमीनी हकीकत यह है कि जिम्मेदारों की उदासीनता और कथित मिलीभगत के चलते ओवरलोड परिवहन पर लगाम पूरी तरह फेल साबित हो रही है।
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि थाना क्षेत्र के एक कारखास की शह पर सेटिंग-गेटिंग का संगठित खेल चल रहा है। सूत्रों के अनुसार शिवपुरी से लेकर लोहारपुर चौराहा, खखरेरू और रक्षपालपुर चौराहे तक सक्रिय लोकेटरों को रियल-टाइम लोकेशन उपलब्ध कराई जाती है, जिससे ओवरलोड वाहन बेखौफ होकर निकल सकें और कार्रवाई से पहले ही मार्ग बदल लिया जाए।
हालांकि जनपद में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) द्वारा ओवरलोड और अवैध गतिविधियों के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि थाना क्षेत्र में खुलेआम सक्रिय लोकेटर अब तक एसटीएफ की पकड़ से बाहर हैं, जिससे अभियान की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
सूत्र बताते हैं कि जनपद का खखरेरू थाना क्षेत्र ओवरलोड परिवहन के मामले में एक हॉटस्पॉट बन चुका है, जहां रात ढलते ही अवैध परिवहन का सिलसिला शुरू हो जाता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या प्रशासन को इस अवैध नेटवर्क की जानकारी नहीं है?
या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे रखी गई हैं?
आखिर कब तय होगी जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक सड़कों पर दौड़ता ओवरलोड परिवहन आमजन की जान और कानून दोनों के लिए खतरा बना रहेगा।

