देवरिया में 8 थानेदारों की “कुरसीबदल”
सभी थानेदार कप्तान बहादुर की नजर में गुड

एन डी देहाती /स्वाभिमान जागरण
देवरिया के कप्तान संजीव सुमन ने आज 8 थानेदारों के जगह में परिवर्तन कर दिया। जिले में आठ थानेदारों के इस “कुरसीबदल” ने जन सामान्य की नजर में सभी आठों थानेदारों को बेहतर पुलिस अधिकारी का अक्स दिखा। प्रायः जब गस्ती निकलती है तो कुछ लाइन में भी जाते हैं, कुछ लाइन से थाने का चार्ज पाते हैं, लेकिन एसपी देवरिया ने किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की इससे साबित हुआ कि उनकी नजर में सभी थानेदार विश्वासपात्र व भरोसेमंद हैं।
आज के स्थानांतरण में देवरिया कोतवाली से विनोद कुमार सिंह को श्रीरामपुर, सुरौली से राकेश कुमार राय को कोतवाली, गौरीबाजार से राहुल कुमार को सुरौली, लार से संतोष कुमार को मईल, मईल से राकेश सिंह को लार, श्रीराम पुर से महेंद्र कुमार को गौरीबाजार, बरहज से दिनेश कुमार को बनकटा व बनकटा से विशाल कुमार को बरहज की जिम्मेदारी दी गयी।
लार में संतोष कुमार का कार्यकाल चार माह रहा
लार थाने पर संतोष कुमार 13 अक्टूबर 2025 को आये थे। कई पुराने मामलों में राहुल हत्या कांड का पर्दाफाश किया। चंद्रावती देवी हत्याकांड के खुलासा में लगे थे इस बीच इनका स्थानांतरण हो गया। इनके स्थानांतरण की खबर के बाद सोशल मीडिया पर संतोष कुमार के पक्ष में कई लोगों ने अपनी पोस्ट की। वास्तव में जिला कप्तान को चलाना होता है, जिसे जहाँ उचित समझते हैं, भेजते हैं, लेकिन जनता भले बुरे कार्यो की समीक्षा जरूर करती है। पांच साल का ही यदि लार थाने के थानेदारों के कार्यकाल की यदि आप समीक्षा करेंगे तो सबसे कम दिन लार में राहुल सिंह डेढ़ महीना, महेन्द्र चतुर्वेदी डेढ़ महीना ही रहे। लेकिन दोनों को लार से बढ़िया और बड़ा थाना मिला। राहुल सिंह लार से बरहज भेजे गए थे जो एक वर्ष से भी अधिक समय बरहज की सेवा किए। इसी प्रकार महेंद्र चतुर्वेदी लार से सलेमपुर भेजे गए जो अब भी सलेमपुर के कोतवाल हैं।
इधर चार वर्षो के भीतर लार के थानेदारों के कार्यकाल पर नजर डालेंगे तो पाएंगे कि 21 अक्टूबर 22 को नवीन चौधरी लार का चार्ज लिए। नौ माह लार में रहे। 8 जुलाई 23 को राहुल सिंह चार्ज लिए डेढ़ महीना रहे। 21 अगस्त 23 को कपिलदेव चौधरी को लार का चार्ज मिला और उन्होंने 15 माह लार की सेवा की। 14 नवंबर 24 को उमेश वाजपेयी को लार का चार्ज मिला और उन्होंने दस माह लार की सेवा की। 1 नवंबर 25 को महेन्द्र चतुर्वेदी को लार का चार्ज मिला और उन्होंने डेढ़ माह लार की सेवा की। 13 अक्टूबर 25 को संतोष कुमार सिंह को लार का चार्ज मिला और इन्होंने चार माह सेवा की।



