बभनियांव में भागवत कथा में गूंजी पूतना उद्धार की लीला, आंखें बंद कर किया भगवान ने राक्षसी का वध

स्वाभिमान जागरण
मईल, देवरिया। स्थानीय विकास खंड भागलपुर के ग्राम बभनियांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में सोमवार को भक्ति रस की अविरल धारा बही। वृंदावन धाम से पधारे प्रसिद्ध कथा मर्मज्ञ पं. राजेश तिवारी ने पूतना वध के रहस्यमय प्रसंग का ऐसा सजीव वर्णन किया कि पूरा पंडाल श्रद्धा से भाव-विभोर हो उठा।
व्यास पीठ से कथा कहते हुए पं. तिवारी ने कहा कि कंस को जब यह ज्ञात हुआ कि उसके काल के रूप में देवकी का आठवां पुत्र जन्म लेकर नंदगांव में सुरक्षित है, तो उसने उसे मारने के लिए अपनी कुटिल सेविका पूतना का सहारा लिया। पूतना अपने वक्ष पर हलाहल विष लगाकर माता के वेश में नंदराय के महल में पहुंची। माता यशोदा ने अबोध बालक समझकर श्रीकृष्ण को उसके हाथों में दे दिया।
उन्होंने बताया कि पूतना की गोद में आते ही लीलाधर श्रीकृष्ण ने अपने नेत्र बंद कर लिए। इसका आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए व्यास जी ने कहा कि भगवान नहीं चाहते थे कि उनकी करुणामयी दृष्टि पूतना पर पड़े, अन्यथा उसके प्रति प्रेम उत्पन्न होने से उसका वध संभव नहीं होता। भगवान ने पहले स्तनपान के बहाने दूध ग्रहण किया, फिर विषपान से पूर्व अपने आराध्य देवाधिदेव महादेव का स्मरण किया और अंत में अपने दिव्य तेज से पूतना के प्राण हर लिए। प्राणांत होते ही वह विकराल राक्षसी रूप में धरती पर गिर पड़ी और भगवान के स्पर्श से उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।
कथा के दौरान तारकेश्वर नाथ दूबे, भुवनेश्वर नाथ दूबे, मदान्ती देवी, कुसुम देवी, शंभूनाथ दूबे, अभिषेक दूबे सहित सैकड़ों धर्मप्रेमी महिला-पुरुष उपस्थित रहे।



