गेहूं का डंठल कदापि न जलाएं किसान, भूमि की उर्वरा शक्ति होगी नष्ट
डंठल जलाने से खेत में ही मर जाते हैं कृषक मित्र कीट
स्वाभिमान जागरण संवाददाता महराजगंज
किसान खेतों में गेहूं का डंठल कदापि न जलाएं, नहीं तो खेत की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाएगी।डंठल जलाने से खेत में केंचुआ और अन्य कृषक मित्र कीट मर जाते हैं और भूमि ऊसर हो जाती है। जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह बातें घुघली विकास खंड के सहायक विकास अधिकारी कृषि वशिष्ठ कुशवाहा एवं एडीओ पीपी केदार नाथ द्विवेदी ने क्षेत्र रामपुर बल्डीहा, बसंतपुर, पुरैना खंडी चौरा, पकड़ी विशुनपुर एवं भिटौली आदि गांवों में किसानों से संपर्क के दौरान कही। उन्होंने कहा कि किसान डंठल जलाकर अपनी कीमती खेती में आग न लगाएं। इससे भविष्य में किसानों को भारी क्षति उठानी पड़ेगी। किसानों इस बात को समझना होगा। खेतों में डंठल न जलाना ही किसानों के हित में हैं। सरकार भी यही चाहती है कि किसान डंठल जलाने से होने वाले नुकसान से बचें।
उन्होंने कहा कि फसल से अच्छी पैदावार हासिल करने के लिए खेत में भरपूर उर्वरा शक्ति होना बहुत आवश्यक है। खेतों में डंठल न जलाकर करके ही उर्वरा शक्ति को प्राप्त किया जा सकता है। इसी तरह समाज कल्याण एवं बाल विकास परिषद बिरैची के सचिव नरेंद्र प्रताप श्रीवास्तव ने भी किसानों से खेत में गेहूं के डंठल न जलाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए किसानों को खेतों में आग लगाने से बचना होगा। अन्यथा खेती चौपट होने से कोई बचा नहीं सकता।



