अन्ना मवेशियों के आतंक से अन्नदाता बेहाल, रात–दिन रखवाली के बाद भी फसल नहीं सुरक्षित
निर्माणाधीन गौशाला बना शोपीस, दो साल से रुका काम

खखरेरू / फतेहपुर नगर पंचायत खखरेरू में इन दिनों अन्ना मवेशियों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि किसानों के लिए खेती बचाना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। किसान दिनभर खेतों में मेहनत करने के बाद रात में भी ठंड के मौसम में खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। बावजूद इसके, अन्ना मवेशियों का झुंड फसलों को चट करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहा।
स्थानीय किसानों ने बताया कि उन्होंने कई बार नगर पंचायत प्रशासन से लेकर उच्चाधिकारियों तक शिकायत पहुंचाई, लेकिन उनकी समस्याएँ जस की तस बनी हुई हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इन मवेशियों को नियंत्रित नहीं किया गया, तो इस सीज़न की पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी।
गौशाला निर्माण दो साल से अधूरा, किसानों में भारी आक्रोश
अन्ना गोवंशों की समस्या को देखते हुए नगर पंचायत क्षेत्र में लगभग दो वर्ष पूर्व गौशाला निर्माण का कार्य शुरू कराया गया था, जिससे इन आवारा जानवरों को संरक्षित किया जा सके। लेकिन दो साल बीत जाने के बावजूद गौशाला का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका। आधी-अधूरी स्थिति में खड़ी गौशाला अब किसानों के लिए सिर्फ एक “शोपीस” बनकर रह गई है।
किसानों का आरोप है कि विभागीय लापरवाही और उदासीनता के कारण गौशाला निर्माण का कार्य अधर में लटका हुआ है, जबकि करोड़ों रुपये की सरकारी योजनाओं का उद्देश्य ही अन्ना मवेशियों को व्यवस्थित रखकर किसानों को राहत देना था।
हर मौसम में संकट, हर सीजन में फसल नुकसान
किसानों ने बताया कि बीते कुछ वर्षों से अन्ना मवेशियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। खेतों में बोई गई गेहूं, मटर, चना, मसूर जैसी रबी फसलें रातोंरात चर ली जाती हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों की मानें तो यदि हालात यूँ ही बने रहे, तो खेती करना घाटे का सौदा साबित होगा।
प्रशासन से सख़्त कदम उठाने की मांग
किसानों ने नगर पंचायत प्रशासन से जल्द से जल्द गौशाला का निर्माण पूरा कराने, अन्ना मवेशियों को सुरक्षित रखने और फसल बचाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से चल रही समस्या के समाधान के लिए अब के बार ठोस कदम की जरूरत है, वरना किसानों की हालत और बदहाल हो जाएगी।
इस संबंध में नगर पंचायत अवर अभियंता ईओ डॉक्टर हरेंद्र से दूरभाष के जरिए कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन साहब फोन बराबर कट कर रहे थे फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा

