पूर्व एमएलसी सर्वशक्ति सिंह की 24वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
प्रतिमा पर माल्यार्पण कर लोगों ने किया भावपूर्ण स्मरण, बोले उनकी कमी आज भी महसूस होती है

मनियर/बलिया। पूर्व एमएलसी व पूर्व नेता विधान परिषद स्वर्गीय सर्वशक्ति कुमार सिंह उर्फ मुनमुन जी की 24वीं पुण्यतिथि पर बुधवार को मनियर के परशुराम स्थान स्थित विनय मंच के पास उनकी आदमकद प्रतिमा पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस दौरान राजनीतिक, सामाजिक और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। लोगों ने उनके व्यक्तित्व, सरल स्वभाव और राजनीतिक जीवन को याद करते हुए कहा कि उनका असमय निधन आज भी क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
नगर पंचायत मनियर के पूर्व चेयरमैन एवं उनके चचेरे छोटे भाई ब्रह्म शक्ति कुमार सिंह उर्फ संजय सिंह ने कहा कि मुनमुन भैया का जाना परिवार ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए भी बड़ी क्षति थी। वह हमेशा नौजवानों को साथ लेकर चलते थे। गरीब, मजलूम, अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक सभी वर्गों के लोगों को समान भाव से साथ लेकर चलना उनकी विशेषता थी। उनका जीवन सरल और सहज था।
डॉ. विजय प्रकाश गुप्ता ने कहा कि सर्वशक्ति सिंह की कमी कभी पूरी नहीं की जा सकती। उनमें राजनीतिक समझ और नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी। वह दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर सोचते थे। उनके अनुसार, यदि सर्वशक्ति सिंह आज हमारे बीच होते तो प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती।
कार्यक्रम का संचालन संकल्प सिंह ने किया। इस मौके पर पूर्व चेयरमैन ब्रह्म शक्ति सिंह उर्फ संजय सिंह , हृदय शंकर तिवारी, अनिल पांडेय, जयराम पांडेय, डॉ. विजय प्रकाश गुप्ता, शमशेर बहादुर सिंह उर्फ कुंदन सिंह, विनय सिंह, अंजनी कुमार सिंह उर्फ कंचन सिंह, सोनू सिंह, अंजनी पांडेय, बच्चा सिंह, शिवनारायण राय, पारसनाथ तिवारी, हरेंद्र सिंह, उदय नारायण यादव, राजेश गुप्ता, प्रमोद कुमार स्वर्णकार, मनोज कुमार सिंह, रामचंद्र वर्मा उर्फ मोछू, अरविंद पासवान सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
सर्वशक्ति सिंह का संक्षिप्त परिचय: 5 नवंबर 1953 को मनियर में जन्मे सर्वशक्ति सिंह पूर्व मंत्री निर्भय नारायण सिंह के तीसरे पुत्र थे। लखनऊ विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वह राष्ट्रीय छात्र संगठन के महासचिव और उत्तर प्रदेश अध्यक्ष रहे। वर्ष 1996 में उन्हें मनोनीत विधान परिषद सदस्य चुना गया। 30 सितंबर 2002 को 49 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।
